ज्ञानपुर। जिले के प्राथमिकी स्वास्थ्य केन्द्रों पर अब मरीजों की पर्ची पर अस्पताल का नाम भी लिखा जाने लगा है। सीएमओ के फटकार के बाद जिले के सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था में सुधार हुआ है। आठ अक्तूबर के अंक में पीएचसी की पर्ची पर डॉक्टर, दवा का नाम, अस्पताल लापता नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। जिसके बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और व्यवस्थाओं में तुंरत सुधार करने के निर्देश पीएचसी प्रभारी को दिया।
जिले के ग्रामीण अंचल में 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, इसमें से लालानगर, जंगीगंज, हरिहरपुर, डेरवा, जयरामपुर सहित सात केंद्रों पर पर्ची काटने के बाद उस पर अस्पताल का नाम नहीं लिखा जाता है। डॉक्टर दवा देकर मरीज को छोड़ देते थे। पर्ची पर कुल 10 कॉलम हैं, इसमें से सिर्फ चार कॉलम नाम, उम्र, लिंग भरा जाता था। बाकि को छोड़ दिया जाता है। मरीज किस सरकारी अस्पताल से दवा लेकर आया है, परिवार के लोगों को पता नहीं चलता है। नौकरी पेशा वाले व्यक्ति को पीएचसी के पर्चे पर आकस्मिक अवकाश लेने में दिक्कते होती थी। अमर उजाला ने आठ अक्तूबर को जब खबर प्रकाशित किया, तो अधिकारी तिलमिला उठे। पीएचसी पर डॉक्टरों के फोन की घंटी घनघनाने लगी। इस संबंध में जवाब मांगा गया, लेकिन संतोष जनक जवाब नहीं मिल सका। उन्हे तुरंत निर्देश किया गया, इस व्यवस्था में सुधार किया जाए।
अस्पतालों की माॅनिटरिंग विभाग द्वारा की गई। डॉक्टर को निर्देशित किया गया कि भविष्य में दोबारा ऐसी गलती हुई, तो पर्ची काउंटर पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी का वेतन रोका जाए। केंद्र प्रभारी से जवाब मांगा जाएगा। अब मरीज का नाम, पता, अस्पताल का नाम सहित 10 कॉलम जो पर्चे पर है। उसे भरना अनिवार्य कर दिया गया है। -
डॉ. एचके चक, सीएमओ