पीड़ित के अधिवक्ता ने बतया कि पीड़ित और उसकी पत्नी सावित्री देवी ने हेल्थ पॉलिसी कराकर उसक प्रीमियम भी जमा किया था। इंश्योरेंस प्लान पांच लाख का मेडिकल क्लेम था। इसके बाद वह प्रीमियम नहीं दे सका, लेकिन बाद में पांच जून 2021 को बीमा नवीनीकृत कराते हुए रिचार्ज बेनिफीट के साथ डेढ लाख रुपये जमा किया। इसके बाद प्रीमियम भुगतान भी किया।
पॉलिसी 7 जून 2022 से 6 जून 2023 तक प्रभावित रही। इस बीच परिवादी को अचानक नाक कान गला में परेशानी हुई। जिस पर उसने डॉक्टर को 30 जून 2022 को दिखाया। जिसके बाद डॉक्टर की सलाह पर पीड़ित ने निजी अस्पताल में आपरेशन कराया। पीड़ित का आरोप था कि क्लेम फॉर्म आदि भरकर देने के बावजूद इंश्योरेंस कंपनी ने हेल्थ पॉलिसी के तहत बीमा क्लेम का भुगतान नहीं किया। जिसके बाद पीड़ित ने उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दायर किया।
उपभोक्ता अदालत में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। आयोग ने सात पन्नों के निर्णय में माना कि इंश्योरेंस कंपनी पीड़ित को दवा, इलाज, आपरेशन का खर्च नहीं देकर सेवा में कमी की। न्यायाधीश अध्यक्ष संजय कुमार डे और महिला सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव के पीठ ने हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के अधिकृत शाखा प्रबंधक और प्रधान प्रबंधक के विरुद्ध वाद को स्वीकार करते हुए बीमा क्लेम की धनराशि 1 लाख 3371 रुपए 6 सितंबर 2022 से आदेश की निर्णय तिथि तक छह फीसदी ब्याज की दर से देने का आदेश दिया। इसके अलावा सेवा में कमी क लिए 25 हजार और मुकदमा खर्च पांच हजार अदा करने का निर्देश दिया। आदेश के अनुपालन में देरी होने पर 12 फीसदी ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।