ज्ञानपुर। महिला कल्याण, बेटियों को बचाने, उन्हें पढ़ाने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का असर भी अब समाज में दिखने लगा है। तमाम जागरूकता कार्यक्रमों की बदौलत लोग जागरूक हुए हैं ओर बेटी-बेटे में अंतर की खाईं काफी हद तक कम हो गई है। यही वजह है कि कालीन नगरी में लिंगानुपात काफी ज्यादा बढ़ा है। यहां अब लड़कियां लड़कों की बराबरी के करीब हैं। 2011 में जहां 1000 लड़कों पर 955 लड़कियां होती थीं वह अब 992 हो गई हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही संख्या बराबर भी हो जाएगी।
सरकार लड़कियों की दिशा-दशा सुधारने के लिए पिछले कुछ वर्षों से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कई महत्वपूर्ण अभियान चला रही है। फिर भी बेटियां जन्म लेने से पहले कोंख में मौत के घाट उतारी जा रही है। पूर्वांचल के अन्य जनपदों में भले ही सरकार की योजनाओं का असर न हो रहा हो लेकिन कालीन नगरी में इसका असर पड़ा है। यहां प्रशासन और महिला विभाग के प्रयास से पिछले तीन वर्षों में 14 की संख्या बढ़ी है। प्रोबेशन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1000 बालकों पर 768 लड़कियां, वर्ष 2019-20 में 1000 बालकों पर 988 और वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 1000 बालकों पर 992 लड़कियों तक पहंच गया।
जिले में लिंगानुपात काफी हद तक सुधरा है। तीन साल पहले एक हजार लड़कों पर 978 लड़कियां थी, लेकिन अब यह संख्या 992 हो गई है। इस वर्ष की सर्वे रिपोर्ट आएगी तो संभवत: जिले में लिंगानुपात बराबर हो चुका होगा। यह सब कुछ जागरूकता कार्यक्रमों की बदौलत ही हो रहा है।
- शत्रुघ्न कन्नौजिया, जिला प्रोबेशन अधिकारी-भदोही