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गौशालाओं में भी बेसहारा बेजुबान

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ज्ञानपुर। बेसहारा मवेशियों के लिए गोशालाएं खोलकर उनका संरक्षण करने के सरकारी दावे धरातल पर खोखले हो गए हैं। गोशालाओं में न तो उनके लिए समुचित चारे-पानी का प्रबंध है न ही ठंड से बचाव का। छह माह से बजट न होने से संचालन बेपटरी हो गया है। पुआल के भरोसे अधिकतर गौशालाएं चल रही हैं। देखभाल नहीं होने सेे कई गायें बीमार होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। पैसा न मिलने से अब ग्राम पंचायतें हाथ खींचने लगी है।
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मंगलवार को अमर उजाला ने जिले की दो गोशालाओं की पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। दोपहर 12 बजे ज्ञानपुर के पूरेरजा स्थित गोआश्रय स्थल में करीब 150 मवेशी बंधे मिले, लेकिन उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। चारे के नाम पर उनकी नाद में कुछ पुआल फेंका गया था। चहारदीवारी न होने के साथ ही ठंड से बचाव के इंतजाम भी नहीं मिले। ठंड की चपेट में आए आठ मवेशी बीमार मिले। ग्राम प्रधान अक्षय कुमार उपाध्याय का कहना है कि छह महीने से एक भी रुपये का बजट नहीं मिला। ऐसे में मवेशियों का पालन-पोषण कठिन हो चुका है। गोवंश की देखभाल पर वह खुद पांच लाख खर्च कर दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। गुजरे एक महीने से गौशाला की देखभाल छोड़ दिया हूं। कुछ लोग पुआल पहुंचा देते हैं, जिसे मवेशी खा रहे हैं। सरकार और प्रशासन अस्थायी गोशालाओं में गो-हत्या करा रही है। अभोली ब्लॉक के असईपुर गोवंश आश्रय स्थल पर 3.28 बजे का हाल। यहां भी कोई कर्मचारी नहीं दिखा, हालांकि गायें अपनी चन्नी पर खड़ी मिली। गौशाला में 40 गायें मिलीं। ग्राम प्रधान राजेंद्र मौर्य ने कहा कि गुजरे छह महीने में वह गायों के देखभाल पर खर्च कर रहे हैं, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला है। विभाग के आश्वासन पर गोसेवा की जा रही है। दोनों गोशालाएं बानगी हैं। कमोबेश अधिकतर गोशालाओं की हालत ठीक नहीं है।
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