भदोही। बीते मार्च में नई दिल्ली में होने वाले इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन रद होने और आगामी अक्टूबर में वाराणसी में होने वाला एक्सपो भी खटाई में पड़ जाने के बाद कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने वर्चुअल इंडिया कारपेट एक्सपो आयोजन से व्यवसायिक जंग जीतने की तैयारी की है। 21 से 25 अगस्त के बीच होने वाले इस एक्सपो में कालीन निर्यातक घर बैठे हिस्सा लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकेंगे। सीईपीसी वर्चुअल एक्सपो के आयोजन की तैयारियों में जुट गई है।
मार्च महीने में नई दिल्ली में होने वाला कारपेट एक्सपो और चीन में होने वाला फेयर कोरोना के चलत रद करना पड़ा था। परिषद के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना काल में भारतीय निर्यातकों के करोड़ों रुपये के तैयार कालीन डंप हैं। कोविड-19 को देखते हुए निकट भविष्य में इससे निजात मिलने की आस भी नहीं है। ऐसे में माल निकालने के लिए भी सोचा जाना चाहिए। कहा कि कोरोना संकट के बीच निर्णय लेना ही पड़ेगा। हम किसी प्रकार से प्रतिद्वंद्वी देशों के सामने कोई अवसर नहीं खोना चाहते। इसलिए अपने निर्यातकों से विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि घर से वर्चुअल कारपेट एक्सपो में भाग लेना आसान तो है ही खर्च भी काफी कम होगा और निर्यातकों को घर बैठे अपने उत्पाद के प्रमोशन की सहूलियत होगी। विदेशी आयातकों के लिए घर बैठे बैठे हमारे उत्पादों का अवलोकन करना भी आसान होगा।
महज 10 हजार रुपये में भी ले सकेंगे भाग
भदोही। सीईपीसी चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह के मुताबिक वर्चुअल फेयर के लिए निर्यातकों को बूथ आवंटन किया जाएगा। एक बूथ के लिए लोगों को 10 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ेगा। जो इंडिया कारपेट एक्सपों में अब तक होते आ रहे खर्च से काफी कम है। यदि कोई दो बूथ अथवा तीन बूथ लेता है तो उसी प्रकार से खर्च बढ़ता जाएगा। बताया कि आयोजन अनुभवी एजेंसियों द्वारा किया जाएगा इसलिए विक्रेता और खरीदार आपस में अच्छी तरह से न केवल रूबरू हो सकेंगे, बल्कि वार्तालाप भी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि कालीन निर्यातकों ने न केवल इस अवधारणा का स्वागत किया है बल्कि 40 निर्यातकों भागीदारी के लिए आवेदन भी कर दिया है। बताया कि अधिक से अधिक खरीदारों को प्लेटफार्म पर लाने के लिए विज्ञापन भी किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक आयातक एक्सपो में हिस्सा लें।