बगैर लाइसेंस के एक व्यक्ति के यहां से अभिरक्षा में ली गई गुलाबी हथिनी के छूटने का इंतजार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सरकारी और विपक्षी अधिवक्ताओं के बीच लंबी बहस चली। वन विभाग की ओर से जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण फैसला नहीं आ सका। न्यायालय का बुधवार को इस मामले में फैसला आएगा।
एक सप्ताह पूर्व 24 मई को मोढ़ के बलभद्रपुर से वन विभाग ने लाइसेंस नहीं होने पर गुलाबी हथिनी को अभिरक्षा में ले लिया था। करीब एक सप्ताह से वन विभाग कार्यालय के बाहर उसे बांधकर रखा गया है। वन विभाग का दावा है कि उसे जरूरी सुविधाएं दी जा रही है,ं लेकिन हथिनी की कमजोर हालत देखकर व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। हथिनी पर गांव के दो लोगों ने दावा पेश किया है। जिसके बाद मामला सीजेएम कोर्ट में पहुंच गया। सोमवार को जरूरी दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किए जाने पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। मंगलवार को वन विभाग के अधिवक्ता पीसी उपाध्याय और हथिनी के कथित मालिक के अधिवक्ता केके सिंह के बीच लंबी बहस चली, लेकिन निर्णय नहीं आ सका। अधिवक्ता केके सिंह ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखा गया है। बुधवार को कोर्ट इस पर निर्णय सुनाएगा। ज्ञात हो, गुलाबी हथिनी का मेडिकल तीन दिन पूर्व किया गया था।