प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगीगंज के आवास का जर्जर कमरा। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने का दावा धरातल पर फेल होता दिख रहा है। जर्जर इमारतों में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों का उपचार करने को विवश हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार कराने आने वाले मरीज चिकित्सकों को दिखाने के दौरान जर्जर भवनों को ही देखते रहते हैं। हालात यह हैं कि दो पीएचसी, 10 उपकेंद्र समेत कुल 36 भवन जर्जर हो चुके हैं, जिनमें अब भी मरीजों की ओपीडी संचालित हो रही है।
जिले में दो जिला अस्पताल, सरपतहां स्थित 100 शैय्या अस्पताल, छह सीएचसी, 20 पीएचसी और 206 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिन पर प्रतिदिन लगभग छह हजार ओपीडी होती है। स्वास्थ्य केंद्रों पर शासन स्तर से आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन दो से ढाई दशक पूर्व बने अस्पताल और भवनों की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है।
लंबे समय से निगरानी न होने के कारण कई अस्पताल और उनके भवन जर्जर हो चुके हैं। दो से ढाई साल पूर्व घोषित इन जर्जर भवनों में अब भी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जयरामपुर, जंगीगंज और मोढ़ आयुर्वेदिक अस्पताल की पड़ताल की। तीनों अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं मिली। यहां रोजाना 100 से 150 की ओपीडी होती है। डॉक्टर जर्जर भवनों में डर के बीच मरीजों का उपचार करते हैं।
यही हाल मतेथू प्रथम, सदोपुर, पुरे विश्वनाथपुर, लक्ष्मणा, पट्टी बेजांव, झौवा, सहसेपुर, सरई मिश्रानी, सर्बतखानी, अमिलौरी आदि उपकेंद्रों का भी है। इन सभी में भवन जर्जर हो चुके हैं।