ज्ञानपुर। ऑपरेशन कायाकल्प से असंतृप्त स्कूलों की दशा सुधारने की मुहिम धड़ाम हो गई। सात माह पूर्व अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने 92 स्कूलों को गोद लिया था, लेकिन इसके बाद उनकी सुधि नहीं ली। मंडलायुक्त, डीएम, सीडीओ, बेसिक शिक्षा अधिकारी कौ छोड़ दिया जाए तो अन्य विभाग के अफसर, विधायक भी गोद लिए स्कूलों में नहीं पहुंच सके। कमजोर मॉनीटरिंग की वजह से स्कूलों में कोई सुधार नहीं हुआ। गोद लिए अधिकतर स्कूलों की ग्रेडिंग सी के आगे नहीं बढ़ सकी।
जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय हैं। इसमें ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सभी स्कूलों के भवन, पेयजल, शौचालय संग अन्य व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं। मंडलायुक्त के निर्देश पर नवंबर 2021 में कायाकल्प से असंतृप्त विद्यालयों को गोद लेकर निगरानी की पहल शुरू हुई। जिले के 92 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया। मंडलायुक्त ने औराई के कटका तो डीएम ने कंपोजिट विद्यालय बैराखास को गोद लिया। दोनों अफसर सात माह में दो से तीन बार विद्यालय पहुंचकर व्यवस्था को देख चुके हैं, लेकिन पंचायत राज, राजस्व विभाग, पूर्ति विभाग, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी गोद लेने के बाद स्कूलों को भूल गए। शुरुआत में बच्चों संग अभिभावकों को लगा कि अब परिस्थितियां बदलेगी, अफसरों के न आने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रभारी बीएसए रमाकांत सिंह ने कहा कि 92 स्कूलों में 30 में सुधार हुआ है। इन्हें ए ग्रेड मिला जबकि शेष अन्य सी श्रेणी में ही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देश पर सी ग्रेड श्रेणी पाने वाले स्कूलों को दुबारा गोद लिया जाएगा।