प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम ग्राम पंचायतों में दम तोड़ती नजर आ रही है। 546 ग्राम पंचायतों में 400 से अधिक में पंचायत भवन बन गए, लेकिन अब तक ये हाईस्पीड इंटनरेट से नहीं जुड़ सके हैं। इसके चलते पंचायत भवन से होने वाले जरूरी कार्य ब्लॉक मुख्यालय से करने पड़ रहे हैं।
करीब तीन साल पूर्व भारत सरकार की तरफ से गांवों को हाईस्पीड इंटरनेट सेवा से जोड़ने की कवायद शुरू की। इसके तहत जिले की सभी 546 ग्राम पंचायतों को हाईस्पीड इंटरनेट सेवा से जोड़ने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाए जाने की शुरूआत की गई। केबल बिछाने की जिम्मेदारी बीएसएनएल को सौंपी गई। दो चरणों में जिले की डीघ, औराई, भदोही, ज्ञानपुर, अभोली और सुरियावां ब्लॉक के 90 फीसदी ग्राम पंचायतों में केबल बिछा दिए गए, लेकिन कनेक्टिविटी नहीं मिली और वाई-फाई की शुरुआत नहीं हो सकी। भारत सरकार की योजना थी कि पंचायत भवनों तक पहुंचने वाले इस इंटरनेट से गांव में बैठकर ही ग्रामीणों के तमाम काम हो सकते हैं, लेकिन प्रयास अभी अधूरा है। इसके चलते सरकार की मुहिम ग्राम पंचायतों में परवान नहीं चढ़ पा रही है। पंचायत राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार 546 ग्राम पंचायतों में से 400 से अधिक में पंचायत भवन के काम शुरू हो चुके हैं। पंचायत सहायक भी नियुक्त कर दिए गए हैं, लेकिन कनेक्टिविटी न होने से विभागीय कामकाज को लेकर दिक्कत होती है। ग्राम पंचायतों में इंटरनेट की सुविधा नहीं होने से ग्राम पंचायत अधिकारी निजी कंपनियों के डोंगल से जरूरी काम करते हैं, हालांकि ग्रामीणों को जरूरी काम कराने के लिए बाजारों में जाना पड़ता है। अगर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो उन्हें पेंशन संग अन्य जरूरी कागज पंचायत भवन से ही मिल सकते हैं। बीएसएनएल के एसडीओ राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि भारतीय संचार निगम लिमिटेड को केबल बिछाने का काम मिला था। 90 फीसदी गांवों में काम पूरे हो चुके हैं। आगे का काम बीबीएनएल (भारत ब्राडबैंड नेटवर्क लिमिटेड) को दिया गया है। उधर, डीपीआरओ बालेश धर द्विवेदी का कहना है कि जिले में कुल 546 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 380 गांवों में सचिवालयों का संचालन भी शुरू हो चुका है। गांवों में ऑप्टिकल फाइबर केबल तो पहुंचा है, लेकिन कनेक्शन नहीं मिल सका है। इसके चलते हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा नहीं मिल रही है। इंटरनेट का कार्य अन्य विकल्पों से किया जा रहा है।