ज्ञानपुर। वसंत पंचमी का पर्व मंगलवार को कालीन नगरी में परंपरागत ढंग से मनाया गया। विद्या की देवी मां सरस्वती की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस खास अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने मोक्ष की कामना लेकर पुण्य सलिला गंगा में डुबकी लगाई। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन से वातावरण भक्तिरस में सराबोर नजर आया।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी हंसवाहिनी की उपासना का भी प्रावधान है। वसंत पंचमी के विशेष नक्षत्र योग में मंगलवार को जिले के गंगा घाटों पर आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने सीतामढ़ी, सेमराध, रामपुर समेत अन्य तमाम घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। घाटों पर भोर में चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया, जो दिन चढ़ने तक जारी रहा। इसके बहाद मंदिरों में लोक कल्याण के निमित्त दर्शन-पूजन का लंबा क्रम चला। सेमराध में गंगा स्नान के बाद बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने महादेव का दर्शन किया। इसी तरह बिहरोजपुर, बेरासपुरी, डेरवां भवानीपुर, भोगांव समेत अन्य गंगा घाटों पर सुबह से लेकर दोपहर तक लोग स्नान करते रहे। स्नान के चलते घाटों की ओर जाने वाली सड़कों पर मेले जैसा नजारा दिखा। गोपीगंज से लेकर रामपुर और सेमराध, सीतामढ़ी में स्नानार्थियों की भीड़ के चलते यातायात प्रभावित होता दिखा। सड़कों पर भीड़ बढ़ गई थी। रामपुर घाट रोड पर अस्थायी दुकानों और गाड़ियों की बेतरतीब पार्किंग के चलते जाम की स्थिति बन गई थी। सड़क पर लंबे समय तक वाहन रेंगते नजर आए। कुछ सार्वजनिक स्थलों पर मेला भी लगा। डुहियां भावसिंहपुर के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ला के मुताबिक वसंत पंचमी की पावन बेला में गंगा स्नान का खास महत्व होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष फल मिलता है।