सुरियावां। सोमवार को एक दिवसीय दौरे पर आए उत्तर रेलवे के जीएम आशुतोष गांगल उन्हीं स्टेशनों पर रुके, जहां पहले से व्यवस्था हैं। जंघई जाते समय सुरियावां, मोढ़, सरायकंसराय स्टेशन होकर ही विशेष सैलून गया। बावजूद इसके न जीएम की नजर पेयजल की समस्या पर पड़ी, न उनकी टीम यह भांप सकी कि ट्रेनों का इंतजार करते समय यात्री धूप में खड़े रहते हैं, बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष शेषधर गुप्ता ने कहा कि अब रेल मंत्री से मिलने पर यात्रियों की समस्याएं दूर होंगी।
महामंत्री अश्वनी साहू ने लखनऊ डिविजन के रेल अधिकारियों पर सवाल उठाया कि लगभग तीन वर्ष से यात्री सुविधाएं बहाल कराने की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने पर निरीक्षण का आश्वासन मिलता है। जब निरीक्षण होता है तब समस्या वाले स्टेशनों की उपेक्षा की जाती है। रोहित चौरसिया ने कहा कि दो वर्ष पूर्व जंघई-वाराणसी रूट की रूपरेखा बदलने में करोड़ों रुपये खर्च कर हुए हैं लेकिन पेयजल, बैठने, शौचालय, आरक्षण केंद्र, छांव, सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि भदोही स्टेशन के पश्चिमी छोर पर स्थित मोढ़, सरायकंसरा और सुरियावां दो लाख से अधिक आबादी को लाभान्वित करते हैं। जतन गुप्ता, रवि जायसवाल, महेंद्र कुमार, कृष्णकांत विश्वकर्मा ने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति का गठन अंदोलन किया जाएगा। जनसंपर्क अधिकारी लखनऊ डिविजन विक्रम सिंह ने बताया कि जीएम आशुतोष गंगल के निरीक्षण में सिर्फ भदोही और जंघई स्टेशनों को शामिल किया गया था। शीघ्र ही दूसरी टीम समस्याओं का आकलन करने पहुंचेगी।