सीतामढ़ी। गंगा के जल स्तर में वृद्धि और हवाओं के चलते लहरों में उछाल से कोनिया क्षेत्र के कई गांव में कटान तेज हो गया है। बुधवार को जलस्तर में स्थिरता आ गई थी, लेकिन बृहस्पतिवार को फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई। दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जल स्तर में बढ़ाव जारी रहा। जलस्तर 76 मीटर को पार कर गया। सीतामढ़ी में गंगा का खतरे के निशान 80 मीटर के सापेक्ष चार मीटर नीचे बह रही है। स्वयंभू-बाबा धवासा नाथ महादेव मंदिर घाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।
बारिश के चलते सहायक नदियों का पानी गंगा में आने से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। बृहस्पतिवार को गंगा का पानी सीतामढ़ी स्थित महर्षि बाल्मीकि आश्रम व पक्का घाट की सीढ़ियों के पास तक पहुंच गया है। उड़िया बाबा आश्रम के नींव तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के इटहरा, मवैयाथान सिंह गांव में गंगा कटान तेज हो गया है। जिससे किसानों की भूमिधरी की उपजाऊ कृषि भूमि गंगा समाती जा रही हैं। गांव छेछुआ और भुर्रा में कटान से किसानों की दिक्कतें बढ़ती जा रहीं हैं।
इटहरा के किसानों का कहना है कि एक दशक में उनकी 18 सौ बीघे खेती की जमीन गंगा की धाराओं ने निगल लिया है। इसी तरह मवैयाथान सिंह गांव के किसानों की भी लगभग 400 बीघे जमीनों पर गंगा में समा चुकी हैं। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर जल स्तर 76.180 मीटर तक पहुंच गया है। कटान रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है।