सीतामढ़ी। गंगा कटान से प्रभावित इटहरा और मवैयाथान सिंह गांव को गंगा कटान से बचाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत सात करोड़ की लागत से पांच लेयर का जियो टेक्सटाइल ट्यूब लगा कर अवरोध तैयार किया जाएगा। कार्य शुरू करने के लिए कार्यदायी संस्था ने छेछुआ और भुर्रा गांव का सर्वे किया। सर्वे के बाद लोगों में कटान से मुक्ति की उम्मीदें बढ़ गई।
कोनिया क्षेत्र तीन तरफ से गंगा नदी से घिरा है, नदी का जलस्तर बढ़ने पर किसानों की कृषि योग्य भूमि कटान की जद में आ जाती है। इस तरह से हर वर्ष किसानों की उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाती है। इस तरह से कटान प्रभावित इटहरा, मवैयाथान सिंह को कटान से राहत देने के लिए कार्यदायी संस्था बंधी निर्माण प्रखंड वाराणसी ने कलिक मवैया बार्डर से इटहरा पश्चिम वाहिनी गंगा तक सर्वे किया। इस दौरान करीब तीन किमी तक जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर की स्थापना के लिए सात करोड़ रुपये का प्रस्तव बनाकर मुख्य अभियंता लखनऊ को भेजा। बजट मिलते ही गंगा कटान रोकने के लिए कार्य शुरू हो जाएगा। बताते चलें कि दोनों गांव में करीब 300 किसानों की दो हजार बीघा जमीन पूर्व में कटान के कारण गंगा में समा चुकी है। कटान प्रभावित छेछुआ और भुर्रा में पांच माह पूर्व तीन लेयर जिओ टेक्सटाईल ट्यूब कटर स्थापित किया गया था, जो कटान रोकने में पूर्णतया कारगर साबित नहीं हो सका। जिसे देखते हुए इटहरा और मवैयाथान सिंह गांव में पांच लेयर जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर स्थापित करने के लिए योजना बनी है। सहायक अभियंता सतीश कुमार मिश्र ने कहा कि इटहरा और मवैयाथान सिंह में कटान रोकने के लिए सात करोड़ की परियोजना तैयार कर शासन को भेजा गया है। इसके पूर्व रविवार को अवर अभियंता आबिद अली ने दोनो गांव का सर्वे भी किया।