कटान का निरीक्षण करते लोग।
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बोली छेछुआ की महिलाएं, अधिकारी आते हैं और देखकर चले जाते हैं
रविवार को अमर उजाला की टीम छेछुआ गांव के कटान क्षेत्र में पहुंची। टीम को देख पुरुषों के साथ गांव की कई महिलाएं पहुंच गईं। कहा कि अधिकारी आते हैं देख कर चले जाते हैं। संतोषी सिंह, रीना सिंह, शालू सिंह ने कहा कि बाढ़ खेती लील गई।
अब बस्ती की ओर बाढ़ आ रही है। हम बेबस हैं कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। छेछुआ के पूर्व ग्राम प्रधान जगदीश सिंह का कहना है कि कटान से हरिहरपुर गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया। छेछुआ के किसानों की लगभग एक हजार बीघा जमीन गंगा में समा चुकी हैं।
दो बीघा जमीन चढ़ गई कटान की भेंट
छेछुआ गांव के प्रधान अमर बहादुर सिंह ने कहा कि छेछुआ और भुर्रा गांव के किसानों की लगभग दो हजार बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। तरी की जमीनों को जोड़ दें तो आंकड़ा साढ़े तीन हजार बीघे तक पहुंच जाएगा। भाजपा सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। किसानों का कहना है कि गंगा में बाढ़ आने के समय गांव में अधिकारियों से लेकर नेताओं का आना जाना लगा रहता है। आश्वासन मिलता है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता है।
गंगा का जलस्तर 78.20 मीटर तक पहुंच गया है। हालांकि गंगा अभी भी चेतावनी बिंदु से ढाई मीटर दूर हैं। वहीं, खतरे के बिंदु से करीब साढ़े तीन मीटर दूर हैं। गंगा के तटवर्ती इलाकों पर नजर रखी गई है। हर घंटे की रिपोर्ट अधिकारी ले रहे हैं। लोगों को दिक्कत होने पर तत्काल टीमें सक्रिय हो जाएंगी। - सुधीर कुमार पाल, एक्सईएन, नहर।