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गंगा कटान से सहमे छेछुआ, भुर्रा के लोग

Sat, 25 Jul 2015 01:45 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
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 छेछुआ के एक दलित परिवार के आशियाने पर संकट के बादल मंडांने लगे हैं। उसके घर से गंगा की धारा चंद फर्लांग की ही दूरी पर है। कटान से अब तक इस दलित परिवार की एक बीघे की जमीन गंगा में समा चुकी है।
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जिले में छेछुआ-भुर्रा से लेकर औराई के कठारी, बाबूसराय तक 40 किमी से अधिक दूरी तक गंगा प्रवाहित होती है। बारिश के सीजन में जलस्तर बढने से तटीय गावों के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है। हालांकि सबसे अधिक नुकसान कोनिया इलाके के छेछुआ और भुर्रा के लोगों को उठाना पड़ता है। तीन तरफ गंगा से घिरे इन गावों में कटान काफी तेजी से होती है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश से जलस्तर बढने लगा है। इससे छेछुआ भुर्रा गावों में कटान शुरू हो गई है। छेछुआ निवासी शोभनाथ गौतम के परिवार पर संकट के बादल मंडांने लगा है। करीब एक दशक पूर्व गंगा से करीब 500 मीटर दूर बना घर अब महज चंद फीट की दूरी पर रह गया है। इस परिवार की एक बीघा जमीन गंगा में पहले ही समा चुकी है। परिवार में 12 सदस्य रहते हैं। पीड़ित शोभनाथ ने बताया कि उसके पास एक धूर जमीन नहीं है ताकि अन्यत्र मकान बनवा सके। ग्रामीणों की मानें तो तीन दशक पूर्व उनका करीब 2900 सौ एकड़ का रकबा था, जो अब करीब 900 एकड़ बचा है। तीन दशक पूर्व जहां उनके आशियाने रहते थे, वहां गंगा की विकराल धारा बह रही है। जहां कोनिया के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, उनका रकबा कम होता जा रहा है वहीं गंगा के दूसरी तरफ इलाहाबाद जिले के बामपुर और उसके सटे गावों का रकबा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छेछुआ और भुर्रा गांव के किनारे गंगा का किनारा करीब दो किमी तक फैला है। बारिश के दिनों में जैसे ही गंगा का जलस्तर बढ़ता है, कटान शुरू हो जाती है। सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वर्तमान समय में गंगा का जलस्तर 70.300 मीटर है। यह आंकड़ा जब 72 मीटर के पार पहुंचता है गंगा से सटे कई गावों में कटान शुरू हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक पांच दशक पूर्व छेछुआ से सटा हरिहरपुर गांव कटान के चलते समाप्त हो चुका है। छेछुआ गांव के अमर बहादुर सिंह, रामजी सिंह, सुरेश सिंह, जितेंद्र बहादुर सिंह आदि ने आरोप लगाया कि कटान से प्रत्येक वर्ष गांव का रकबा कम होता जा रहा है। बाढ़ आने पर प्रशासन के लोग नजर आते हैं और कागजी कोरम पूरा कर लौट जाती है। समाजसेवी आदर्श पांडेय और ओम प्रकाश दूबे ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए  कटान रोकने की मांग की है।  
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