छत्तीसगढ़- झारखंड के लोगों को भदोही के भोरी गांव का निवासी बनकर 250 से ज्यादा जन्म प्रमाणपत्र जारी किए। फर्जीवाड़े पर जिले के अफसरों की नजर नहीं पड़ी, लेकिन अप्रैल में समीक्षा बैठक के दौरान लखनऊ में महानिदेशक स्वास्थ्य ने मामले को पकड़ लिया था।
भदोही जिले में 250 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह ने झारखंड की फातिमा और छत्तीसगढ़ के महेश कुमार को सुरियावां के भोरी गांव के निवासी बना दिया। अवैध ढंग से पैसे कमाने की चाह में जालसाजों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नियमों को भी ताक पर रखा।
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आजमगढ़, गोरखपुर ही नहीं झारखंड और छत्तीसगढ़ के लोगों का भी भोरी गांव से प्रमाणपत्र जारी कर दिया। फर्जीवाड़े पर जिले के अफसरों की नजर नहीं पड़ी, लेकिन अप्रैल में समीक्षा बैठक के दौरान लखनऊ में महानिदेशक स्वास्थ्य ने मामले को पकड़ लिया था। जिले में नामित अफसरों ने जांच की तो फर्जीवाड़े की परत खुलनी शुरू हो गई।
शासन के निर्देशानुसार, जन्म प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणपत्र ब्लॉक, तहसील से पंचायत राज विभाग से संस्तुति होने के बाद बनते हैं। सुरियावां ब्लॉक के जालसाजों ने 250 से अधिक प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से जारी कर दिए। महानिदेशक स्वास्थ्य ने सीआरएस पोर्टल की समीक्षा के दौरान इसे पकड़ा। उसके बाद जिले स्तर पर गठित टीम ने जांच की तो मामला सामने आया।
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मामला पुलिस और क्राइम ब्रांच के पास पहुंचा। यहां जांच में पता चला कि ग्राम विकास अधिकारी एवं सचिव की आईडी के सहारे गोरखपुर, वाराणसी, अंबेडकरनगर समेत यूपी के कई जिले के प्रमाणपत्र सुरियावां ब्लॉक के भोरी गांव से जारी कर दिए गए। इसमें झारखंड की फरीदा पुत्री आरिफ, रमेश गंझू पुत्र बोसीन गंझू और छत्तीसगढ़ के महेश कुमार पुत्र किशनलाल के प्रमाणपत्र भी हैं। तीनों प्रमाणपत्र नक्सल प्रभावित राज्य के हैं।
पहले वीडीओ को निलंबित किया, फिर बहाल
250 फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों में 90 फीसदी भोरी गांव के ग्राम विकास अधिकारी गोपाल मिश्र की आईडी से जारी हुए थे। इस कारण उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और शुरुआती जांच के बाद तत्कालीन डीडीओ ज्ञान प्रकाश ने निलंबित कर दिया था, लेकिन कुछ ही दिन बाद उनको बहाल कर दिया गया। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि मामले की जांच पूरी हुए बिना किस आधार पर बहाली कर दी गई। वहीं इस मामले में कुछ और भी सचिव पुलिस जांच के दायरे में आए हैं।
रजिस्टर में 68, जारी किए 194 प्रमाणपत्र
सुरियावां ब्लॉक के भोरी गांव में छह महीने में जन्म प्रमाणपत्र के लिए 68 आवेदन आए जबकि जालसाजों ने 194 लोगों के प्रमाणपत्र जारी कर दिए। इसमें 46 ऐसे हैं जो उस गांव के निवासी हैं जबकि शेष अन्य अलग-अलग जिले के हैं। बिना किसी ठोस साक्ष्य के और बिना किसी सक्षम अधिकारी के अनुमोदन के मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किए गए। मृत्यु प्रमाणपत्र के सिर्फ 18 आवेदन आए जबकि 54 जारी किए गए।
पंचायत सहायक हो चुका है बर्खास्त, आईडी भी निलंबित
250 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाले मनापुर के पंचायत सहायक कृष्ण कुमार प्रजापति को पिछले दिनों विभाग ने बर्खास्त कर दिया था। मामले में बिंद प्रदूषण केंद्र सुरियावां के संचालक प्रदीप कुमार निवासी गहरपुर बरसठी जौनपुर और आधार सुधार केंद्र मोढ़ पुरानी बाजार के संचालक कमलकांत यादव निवासी चककिशुनदास को भी जेल भेजा गया है। दोनों केंद्र की आईडी भी निलंबित कर दी गई है। ईडीएम आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों की आईडी को निलंबित कर दिया गया है।
केस-1 रमेश गंझू पुत्र बोसीन गंझू मूल रूप से झारखंड के रहने वाले हैं। गठित टीम की जांच में पाया गया कि इनका प्रमाणपत्र भोरी गांव से जारी किया गया है।
केस-2 आर्यन, संजीव कुमार, विशाल मूल रूप से जौनपुर के रहने वाले हैं। जालसाजों ने भोरी गांव से सभी का जन्म प्रमाणपत्र जारी किया है।
केस-3 भोरी गांव में त्रिपाठी जाति का कोई नहीं है। यहां से मूल रूप से गोरखपुर के मूल निवासी सक्षम त्रिपाठी का जन्म प्रमाणपत्र जारी किया है।
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करना गंभीर विषय है। मामले में पंचायत सहायक समेत तीन गिरफ्तार हो चुके हैं। टीमें आगे की जांच कर रही हैं। गिरोह में शामिल अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है। -शुभम अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक