ज्ञानपुर। काशी नरेश राज्य विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसरों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह अधिनियम महिलाओं के विकास एवं उत्थान में मील का पत्थर साबित होगा। भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ये एक ऐतिहासिक पहल है।
महिला आरक्षण विधेयक लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनता है। इससे आधी आबादी को नीति निर्माण और निर्णय लेने में भागीदारी मिलेगी। तभी सही अर्थों में सच्चा लोकतंत्र स्थापित होगा।
- डॉ. अंशुबाला, एसोसिएट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान
राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक पहल है। ये विधेयक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगा।
- डॉ. मोनिका सरोज, बीएड विभाग
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना समय की मांग है। अधिनियम से महिलाओं की आवाज सशक्त होगी, बल्कि समाज के विभिन्न मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा के मुद्दे पर वह निर्णय ले सकेंगी।
- डॉ. रश्मि सिंह, प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जा रहा है। अधिनियम में यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि दलित, पिछड़े एवं आदिवासी वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण मिले, जिससे वे भी समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित हो सकें।
- डॉ. ज्योति यादव असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग