ज्ञानपुर। जिले में गर्मी के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। निकाय क्षेत्रों से लगायत ग्रामीण इलाकों में मच्छरों के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी से संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन फॉगिंग के नाम पर केवल कोरमपूर्ति हो रही है। निकाय क्षेत्रों में केवल कागजों पर फॉगिंग कराई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में अब तक दवाओं का छिड़काव नहीं शुरू हो सका है।
जिले में पिछले साल डेंगू के रिकार्ड मरीज सामने आए थे। बीते पांच साल में सबसे अधिक 2023 में 280 डेंगू के मरीज मिले थे। जिले की सात निकायों में कुल साढे तीन लाख और 546 ग्राम पंचायतों में 16 लाख की आबादी रहती है। जिले में गर्मी बढ़ने के बाद पिछले कुछ दिनों से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। मच्छर के काटने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड समेत अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर बना रहता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग अभी से अलर्ट मोड पर भी आ गया है और गांव-गांव संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है, लेकिन इसके उलट अब तक गांवों में दवाओं का छिड़काव शुरू नहीं हो सका है। दूसरी तरफ निकायों की भी वहीं स्थिति है। जिले की सात निकायों में कुछ को छोड़कर अन्य में केवल कागजों पर फॉगिंग कराई जा रही है। इससे मच्छरों को पनपने का डर बना हुआ है। निकायों के साथ ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह फैले कचरे इसकी आशंका को बढ़ावा दे रहे हैं। विभाग के अनुसार संक्रामक रोगों का खतरा मानसून के सीजन में सबसे अधिक होता है, लेकिन अगर पहले से तैयारियां पुख्ता रहे तो मानसून सीजन में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका कम रहेगी।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है। अभी तक हर विभाग की रिपोर्ट अच्छी मिली है। फॉगिंग भी नियमित रूप से हो रही है। यदि कहीं नहीं की जा रही है, तो इसे लेकर निकाय प्रशासन से बातचीत की जाएगी। - राम आसरे पाल, जिला मलेरिया अधिकारी, भदोही।
विभाग के दावे पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
अभोली ब्लॉक के नागमलपुर गांव निवासी अर्जुन यादव ने बताया कि गांव में इस सीजन में अब तक छिड़काव नहीं हो सका है, जबकि मच्छरों का असर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इसके पहले भी छिड़काव के नाम पर केवल कोरमपूर्ति हुई है। ज्ञानपुर के भिदिउरा निवासी सुभाष दुबे ने बताया कि गांव में कभी-कभार छिड़काव होता है। इस बार अब तक छिड़काव नहीं हो सका है। डीघ ब्लॉक के सदाशिवपट्टी निवासी अनिल यादव ने बताया कि गांव में दवाओं का छिड़काव नहीं किया जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके चक ने बताया कि ग्रामीण स्वास्थ्य सफाई पोषण समिति के तहत हर गांव में दवाओं के छिड़काव के साथ चूना छिड़काव के लिए 10 हजार का बजट जारी किया जाता है। यह धनराशि आशा और प्रधान के संयुक्त खाते में जारी होता है। स्वास्थ्य विभाग इसका नोडल होता हैं, लेकिन हर साल छिड़काव के नाम पर केवल फोटोबाजी होती है। कुछ जगहों पर दवा डालकर विभाग को फोटो भेज दी जाती है और जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है।