UP Politics: भदोही लोकसभा सीट 2009 के परिसीमन के पहले मिर्जापुर-भदोही संसदीय सीट के नाम से जानी जाती थी। इस सीट से पंडित श्यामधर मिश्र, उमाकांत मिश्र, रमेश कुमार दुबे और गोरखनाथ पांडेय को सांसद बनने का गौरव प्राप्त है। 2009 के परिसीमन के बाद हुए तीन लोकसभा चुनावों में ब्राह्मण, राजपूत और पिछड़ी जाति के एक-एक सांसद हुए हैं।
पूर्वांचल की राजनीति में जाति एक बड़ा फैक्टर है। हर पार्टियां सोशल इंजीनियरिंग का गणित बैठाने के बाद ही प्रत्याशी का चुनाव करती हैं। भदोही लोकसभा सीट से सर्वाधिक पांच सांसद पिछड़ी जाति के हैं। वहीं ब्राह्मण, राजपूत और मुसलमानों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा है। 2009 के परिसीमन के बाद हुए तीन लोकसभा चुनावों में ब्राह्मण, राजपूत और पिछड़ी जाति के एक-एक सांसद हुए हैं।
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पूर्वांचल की सियासी जमीन जातीय राजनीति के लिहाज से काफी मुफीद मानी जाती है। राजनीतिक पार्टियों का पूर्वांचल की सीटों पर काफी फोकस होता है। कहीं राजभर, कहीं भूमिहार, कहीं राजपूत तो किसी सीट पर मुसलमान और ब्राह्मण उम्मीदवारों को तरजीह मिलती है। भदोही लोकसभा सीट 2009 के परिसीमन के पहले मिर्जापुर-भदोही संसदीय सीट के नाम से जानी जाती थी। परिसीमन के बाद प्रयागराज की दो विधानसभा प्रतापपुर और हंडिया को जोड़ने के बाद भदोही लोकसभा अस्तित्व में आई।
भदोही लोकसभा में ब्राह्मण, बिंद और मुसलमान मतदाता हार-जीत की भूमिका तय करते आ रहे हैं। अब तक के परिणामों की बात करें तो मुकाबला बराबरी वाला रहा है। इस लोकसभा से पांच बार पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों ने विजयश्री हासिल की है। वहीं ब्राह्मण, राजपूत एवं मुस्लिम सांसद भी चुने गए। भदोही सीट पर पिछड़ी जाति से आने वाले सांसदों में फूलन देवी, रामरति बिंद और रमेश चन्द्र बिंद और नरेंद्र कुशवाहा हैं। फूलन देवी ने यहां से दो बार जीत दर्ज की है।
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इसी तरह इस सीट से पंडित श्यामधर मिश्र, उमाकांत मिश्र, रमेश कुमार दुबे और गोरखनाथ पांडेय को सांसद बनने का गौरव प्राप्त है। मुस्लिम जमात के कद्दावर नेता अजिज इमाम इस सीट से दो बार सांसद चुने गए जबकि फकीर अली अंसारी और यूसूफ बेग को एक-एक बार जनता ने जीताकर दिल्ली भेजा। उधर, राजपूत समुदाय से वीरेंद्र सिंह मस्त भदोही से तीन बार सांसद रहे। वहीं एक बार वंश नारायण सिंह सांसद निर्वाचित हुए।