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बीकेपी विधि से खेती, सुधरेगी मिट्टी की सेहत

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जिले में जैविक खेती संग बीकेपी (भारतीय कृषि पद्धति) से भी खेती की जाएगी। इसके लिए छह हजार एकड़ भूमि में खेती का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग ने कार्ययोजना बनाकर किसानों का चयन शुरू कर दिया है। जीवामृत विधि से रबी, खरीफ सहित अन्य फसलों की खेती की जाएगी। इससे एक तो जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और मिट्टी की सेहत में सुधार होगा, साथ ही खेती की लागत कम होगी तो किसानों की आय भी बढ़ेगी।
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जिले में करीब 65 से 70 हजार हेक्टेयर रकबे में हर साल गेहूं और धान की खेती की जाती है। अधिक पैदावार के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का अधिकाधिक प्रयोग करते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति. का तेजी से क्षरण होता है। ध्यान नहीं दिए जाने से अल्प समय में खेत ऊसर बन जाता है। करीब पांच साल से सरकार जैविक खेती के माध्यम से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ा रही है। अब भारतीय कृषि पद्धति से खेती करने की तैयारी चल रही है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि नए सत्र में छह हजार एकड़ में खेती शुरू कराई जाएगी। इसमें किसान को एक गाय रखना अनिवार्य होगा। उसके गोबर और मूत्र से जीवामृत तैयार होगा। जो फसल के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने बताया कि सभी ब्लॉक से एक-एक हजार किसानों का चयन किया जाएगा। खेती में सरकार शत प्रतिशत अनुदान देगी। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि 200 लीटर के एक ड्रम में 15 किलो गाय का गोबर, 10 लीटर मूत्र, एक किलो बेसन, दो किलो गुड़, बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी डाल दें। उसके बाद जितना ड्रम खाली हो उतना पानी भरकर जूट की बोरी से ढक देें। गर्मी में चार दिन और ठंड में सात दिन ड्रम में रखें। उसके बाद हर महीने फसल में छिड़काव करें। अगर फसलों में कीटनाशक लग गए हैं तो नीमामृत से उसे बचाया जा सकता है। उप निदेशक ने बताया कि 100 लीटर के एक ड्रम में पांच किलो नीम की चटनी, आधा किलो लहसुन, हरी मिर्चा, मदार और धतूर की पत्ती, रेड़ की पत्ती को डाल दें। दो से तीन दिन उसे सड़ने दें और उसके बाद एक एकड़ में छिड़काव कर दें।
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