नमामि गंगे योजना से जुड़े किसानों का बाजरा अब वालमार्ट जैसी नामी गिरामी कंपनी बेचेंगी। कृषि विभाग ने निजी कंपनी से बेचने की पहल शुरू कर दी है। बाजार भाव से किसानों को 100 से लेकर 200 रुपये तक अधिक कीमत देने को लेकर चर्चा अंतिम दौर में पहुंच गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
जिले में गंगा से सटे 47 गावों में 4700 हजार हेक्टेयर रकबे में दलहन, तिलहन, बाजरा प्रजाति के फसलों की खेती की जा रही है। जिले में कुल 2918 हेक्टेयर रकबे में बाजरा की खेती हो रही है, जिसमें दो हजार से अधिक नमामि गंगे के तहत हो रही है। फसल करीब-करीब अब तैयार हो चुकी है। बाजार में किसानों को उम्मीद के हिसाब से कीमत नहीं मिल रही है। इसको लेकर कृषि विभाग ने पहल शुरू कर दी है। वालमार्ट कंपनी से बाजरा बेचने को लेकर बातचीत चल रही है। जिसमें कंपनी एमएसपी रेट से ही बाजरा खरीदना चाहती है जबकि विभाग 100 से 200 रुपये अधिक कीमत तय करने पर बात कर रही है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि किसानों की सहूलियत के लिए निजी कंपनी से बातचीत चल रही है। जल्द ही इसपर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक हजार एमटी बाजरा बेचने का लक्ष्य तय किया गया है। फिलहाल जिस कंपनी से बातचीत चल रही है वह न्यूनतम समर्थन मूल्य 2150 रुपये प्रति क्विंटल देने केे तैयार है। प्रयास किया जा रहा है इससे ज्यादा मिले, जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले।
बाजरा से बने खाद्य पदार्थ बनाकर बेचेगी कंपनी
ज्ञानपुर। किसानों से बाजरा खरीदकर वालमार्ट कंपनी अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार कराकर उसे बेचेगी। जिसकी उसे अच्छी खासी कीमत मिलेगी। नमामि गंगे योजना में गंगा से सटे 4700 हेक्टेयर में जैविक खेती की गई है। इसलिए कंपनी जहां बाजरा खरीदने के लिए उत्सुक है वहीं विभाग किसानों को कुछ और लाभ दिलाने की मुहिम में जुटी है।
कैसे करायी जाएगी खरीद
उप कृषि निदेशक अरविंद सिंह ने बताया कि जिस कंपनी से बात चल रही है वह जिले के कुछ स्थानों पर अपना गोदाम बनाएगी। किसानों को बताया जाएगा कि उस गोदाम के पास पहुंचकर निर्धारित मूल्य पर बपना बाजरा बेच सकते हैं। इस तरह से किसानों को जिले के बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा और उचित मूल्य भी मिल जाएगा।