भदोही। यूक्रेन पर रूसी हमले के दूसरे दिन भी संस्थानों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों में काम कम हुआ और युद्ध पर लोगों का ध्यान अधिक रहा। कालीन उद्यमी कालीन उत्पादन के बीच समाचारों में युद्ध के ताजा हालात जानने को बेताब दिखे। उनकी चिंता यह है कि कारोबार पर असर पड़ने से पहले युद्ध थम जाए। लेकिन रूसी राष्ट्रपति के तेवरों से लगता है कि यूक्रेन पर कब्जे के बाद ही वे रुकेंगे। निर्यातकों ने कहा कि रूस और यूक्रेन के शिपमेंट को खरीदारों ने होल्ड करा दिए हैं। जिससे परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। लोगों का कहना है युद्ध टालने के हर संभव प्रयास होने चाहिए नहीं तो विश्व व्यापार पर इसके दूरमागी परिणाम होंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध में नाटो की सहभागिता से जुड़ी चर्चा सामने आने पर कालीन नगरी यानी भदोही के निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि नाटो के सदस्य देशों में ज्यादातर देश कालीन के आयातक देश हैं।
गोपीगंज के कालीन निर्यातक बृजेश गुप्ता ने बताया कि युद्ध किसी लिहाज से ठीक नहीं है। कोविड से लड़ रही विश्व की जनता को कारोबार चलने का इंतजार है। धीरे-धीरे शुभ समाचार मिल भी रहे थे कि दो देशों के बीच युद्ध छिड़ने से कारोबार पर असर पड़ने लगा है। बताया कि उनके यूक्रेन और रूसी खरीदारों ने शिपमेंट रोककर रखने का निर्देश दिया। इसका उत्पादन पर असर पड़ेगा। रूस जो माल खरीदता है वह दूसरे देशों में नहीं चलता। इसलिए रूस के लिए बने कालीन गोदामों में डंप रहेंगे। अनिश्चितता के माहौल के बीच शीघ्र ही युद्ध टलने और कारोबार सुचारू होने का इंतजार है। लोगों का कहना है कि रूस और यूक्रेन विवाद की जड़ में नाटो हैं। नाटो में कई देश सदस्य हैं और उनमे से लगभग को कालीन निर्यात होता है। अनिश्चितता का जो मौहाल बन रहा है उससे यदि नाटो देशों ने खरीदी रोकी तो उद्योग के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। इसलिए हमें युद्ध नहीं चाहिए।