कभी किसी नाबालिग बच्चे का अपहरण तो कभी किसी को बहला-फूसलाकर भगा लिया जाता है। परिवार के लोग इधर-उधर खोजते हैं, लेकिन उनका पता नहीं चलता है। पुलिस के रिकार्ड के अनुसार जिले में औसतन हर नौवें दिन एक बच्चा गायब होता है। हालांकि उनमें से ज्यादातर की बरामदगी कहीं न कहीं से कर ली जाती है। गायब होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक होती है।
पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीते छह महीने में कुल 20 बच्चे गायब होने की जानकारी मिली। बच्चों के गायब होने पर विभिन्न थानों में मुकदमा भी दर्ज किया गया, लेकिन उसमें से चार अभी भी बरामद नहीं हो पाए हैं। गायब हुए बच्चों में सात बालक और 14 बालिकाएं शामिल हैं। इसमें से पांच बालक और 12 बालिकाएं बरामद तो कर ली गई हैं, लेकिन दो बालक और दो बालिकाएं अभी बरामद नहीं हुए हैं। बीते कुछ वर्षों की बात करें तो जनवरी 2006 से लेकर अब तक डेढ़ सौ से अधिक बच्चे गायब हुए हैं। इनमें से 37 बच्चे अभी तक नहीं मिल पाए हैं। उनकी तलाश अब भी जारी है। अपर पुलिस अधीक्षक राजेश भारती का कहना है कि जो भी बच्चे गायब होते हैं, उनकी रिपोर्ट दर्ज की जाती है। उसके बाद परिवार के लोगों से विभिन्न तरह की जानकारी लेकर उनकी खोज की जाती है। काफी हद तक बच्चे बरामद भी हुए हैं। इधर, छह माह में गायब हुए 20 बच्चों में से चार की बरामदगी की जानी है। बच्चों को खोजने के लिए बीच-बीच में अभियान भी चलाया जाता है।