ज्ञानपुर। धान खरीद में लापरवाही बरतने पर चार समितियों को गेहूं खरीद की सूची से हटा दिया गया है। किसानों का समय से भुगतान न करने पर शासन स्तर से यह कार्रवाई की गई। अब विपणन, पीसीएफ समेत सात एजेंसियों से ही गेहूं की खरीद की जाएगी। अबकी बार तहसील के अधिकारियों को तीन दिन के अंदर सत्यापन करना अनिवार्य होगा। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता होने पर प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
जिले में एक अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूं खरीद की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच गई है। किसानों से बेहतर खरीद और उन्हें समय से उपज का मूल्य देने के लिए शासन ने नई खरीद नीति जारी की है। इस बार किसानों के लिए केंद्र निर्धारित कर दिए जाएंगे। अभी तक यह होता रहा है कि किसान इधर-उधर केंद्रों पर अपना उपज बेच देते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। किसानों का गांव जिस केंद्र पर पंजीकृत होंगे उसी केंद्र पर गेहूं बेच पाएंगे। पंजीकरण के साथ ही किसान खुद आवेदन कर टोकेन प्राप्त कर सकेंगे। 100 क्विंटल से अधिक गेहूं बेचने वाले किसानों का सत्यापन अनिवार्य है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने बताया कि धान खरीद में लापरवाही बरतने पर नेफेड, एनसीसीएफ, एफपीओ और कर्मचारी कल्याण निगम एजेंसी को खरीद से हटा दिया गया है। धान खरीद में किसानों के भुगतान में विलंब करने पर खरीद कार्य से हटाया गया। बताया कि गेहूं की खरीद एक अप्रैल से 15 जून तक 23 केंद्रों पर होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। खरीद बायोमेट्रिक तरीके से की जाएगी। गेहूं खरीद के लिए शासन की ओर से कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। मोबाइल एप के माध्यम से किसानों को खरीद केंद्र का लोकेशन भी मिलेगा।