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कात्यायनी स्वरूप की भक्तों ने की पूजा

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ज्ञानपुर। वासंतिक नवरात्र के छठवें दिन रविवार को आदि शक्ति के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी विधि पूर्वक पूजा की गई। इस दौरान देवी पाठ एवं मंत्रों से घर और आंगन गुंजायमान रहे। घंटा-घड़ियाल की गगनभेदी आवाज से पूरा वातावरण भी देवीमय रहा। साप्ताहिक लॉकडाउन के कारण मंदिरों में हर रोज की अपेक्षा भक्तों की संख्या कम रही।
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मान्यता है कि भगवती दुर्गा देवताओं को कार्य सिद्ध करने के लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई और कात्यायनी के नाम से विख्यात हुई। इनका स्वरूप भव्य, दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के चार भुजाओं में दाहिने ओर के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में तथा नीचे वाला वर मुद्रा में है। बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है और वाहन शेर है। रविवार को सुबह से ही घरों में देवी की आराधना शुरू हुई। पूजन सामग्री से सजी थाल, नारियल, चुनरी के साथ भक्त विधि-विधान से पूजन- अर्चन कर रहे थे। आदि शक्ति के एक झलक पाने के लिए लोग आतुर दिखे।
नगर के घोपइला माता मंदिर सहित गोपीगंज स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर, काली देवी मंदिर, कबूतरनाथ मंदिर आदि स्थानों पर पुजारी ने आरती की। आचार्य संदीप पांडेय ने कहा कि वासंतिक नवरात्र में सातवें दिन देवी कालरात्रि के दर्शन- पूजन किए जाते हैं। भगवती के इस रूप में संहार की शक्ति है। मृत्यु अर्थात काल का विनाश करने की शक्ति भगवती में होने के कारण इनको कालरात्रि के रूप में पूजा गया। इनके शरीर का रंग एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है।
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