सीतामढ़ी। लवकुश इंटर कॉलेज सीतामढ़ी में सोमवार को तुलसीदास की जयंती मनाई गई। भक्तों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनकी कालजयी रचना ‘रामचरित मानस’ की चर्चा की। कहा कि प्रमाण मिलता है कि तुलसीदास गंगा यात्रा के दौरान सीतामढ़ी में वट वृक्ष के नीचे तीन दिन तक प्रवास किए थे।
रामधर पांडेय ने कहा कि महाकवि तुलसीदास का जन्म श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था। वह प्रभु श्रीराम के परम भक्त थे। उन्होंने कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल, रामलला नहछू आदि रचनाएं कीं। मुन्नालाल पांडेय ने कहा कि श्रीरामचरित मानस हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है। तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में हुआ था। उनके माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्माराम दुबे था। तुलसीदास जी माता की मृत्यु हो जाने पर उनके पिता ने उन्हें अशुभ मानकर त्याग दिया था। उनका पालन पोषण दासी ने किया था। हालांकि जब दासी ने भी उनका साथ छोड़ दिया तब उन्हें अपने जीवन में काफी कष्ट उठाने पड़े। विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष के बूते वह अमर हो गए। इस मौके पर चंदन पंडित, श्यामकिशोर, मनोज चौबे, कल्लू गौड़, संतोष तिवारी आदि रहे।