ज्ञानपुर। जिले के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) और उप मुख्य चिकित्साधिकारी (डिप्टी सीएमओ) ओपीडी में बैठने से कतरा रहे हैं। महीने में एक बार किसी एक अस्पताल पर पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं को देखने और मरीजों का उपचार करने के निर्देश के बाद भी कोई भी एसीएमओ या डिप्टी सीएमओ न तो अस्पताल पर पहुंचते हैं और न ही ओपीडी में मरीजों का उपचार करते हैं।
जिले के सीएमओ ऑफिस में दो एसीएमओ और चार डिप्टी सीएमओ की तैनाती है। इनके ऊपर स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने के साथ-साथ शासन की योजनाओं की मॉनीटरिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है। इन्हें कई बार निजी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड या फिर एक्सरे सेंटर के खिलाफ आने वाली शिकायतों की जांच के लिए भी नामित किया जाता है। इसके अलावा शासन का निर्देश है कि सीएमओ से लेकर डिप्टी सीएमओ और एसीएमओ भी महीने में कम से कम एक बार किसी भी अस्पताल की ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार भी करेंगे। इसके अलावा वहां की व्यवस्थाओं को भी देखेंगे। यह सीएचसी, पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल, एमबीएस भदोही, 100 बेड अस्पताल मे से किसी भी अस्पताल में जाकर मरीज देखना है लेकिन ऐसा हो नही रहा है। एक डिप्टी सीएमओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि काम का बोझ इतना है, ओपीडी में बैठने का समय भी नहीं मिलता है। कागज पत्रक दुरुस्त करना, बैठक, निरीक्षण, जांच आदि सहित विभिन्न कार्यों में समय बीत जाता है। जिसके कारण ये ओपीडी में नहीं बैठ पाते हैं।
डिप्टी सीएमओ और एसीएमओ को महीने में एक बार ओपीडी में बैठने का निर्देश है, लेकिन वे ऐसा नहीं करते तो सभी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और इसे शासन को प्रेषित किया जाएगा।
- डाॅ.
एसके चक, सीएमओ, भदोही।