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फसलों की होगी सुरक्षा, 5900 हेक्टेयर की होगी तारबंदी

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छुट्टा पशु और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए 5900 हेक्टेयर क्षेत्र की तारबंदी कराई जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। इस कार्य पर खर्च होने वाली धनराशि में से 50 फीसदी अनुदान संबंधित किसानों को दिए जाने की योजना है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुए विचार-विमर्श के दौरान मुख्य सचिव की अनुमति मिलने पर विभाग ने पहल शुरू कर दी है।
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जिले में 60 से 70 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं, धान, दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती होती है। नीलगाय, छुट्टा पशु और जंगली जानवरों के कारण अक्सर किसानों की तैयार फसल नष्ट हो जाती है। इससे उनको काफी नुकसान उठाना पड़ता है। तीन माह पूर्व मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कृषि विभाग को तारबंदी का प्रस्ताव तैयार का निर्देश दिया था। इसके मद्देनजर कृषि विभाग ने गंगा से सटे 47 गांवों की 4700 हेक्टेयर और 1200 हेक्टेयर अन्य क्षेत्रों की फसलों की तारबंदी के लिए प्रस्ताव भेजा है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि तारबंदी की योजना का प्रस्ताव भेज दिया गया है। प्रथम चरण में 5900 हेक्टेयर रकबा चिह्नित किया गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर गंगा से सटे गांवों में इस योजना को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा। गंगा से सटे गांवों में नीलगाय, जंगली सुअर सहित अन्य जंगली जानवरों के कारण आलू, दलहनी, तिलहनी, मक्का, ज्वार, बाजरा, सब्जी सहित गेहूं, धान की फसलों को काफी नुकसान होता है।
प्रगतिशील किसान रामअकबाल तिवारी का कहना है कि तारबंदी से किसानों को लाभ मिलेगा। सरकार इस प्रस्ताव को अमल में लाए। छुट्टा पशु और जंगली जानवरों से किसानों को काफी नुकसान होता है। किसान मो.नसीम ने कहा कि हर साल उनकी पांच बिस्वा सब्जी जंगली जानवर नष्ट कर देते हैं। तारबंदी से फसल को बचाया जा सकेगा।
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