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प्रांतीय स्तर पर फैला है पशु तस्करों का नेटवर्क

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ज्ञानपुर। शासन-प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी हाईवे पर पशु तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। पुलिस डाल-डाल तो पशु तस्कर पात-पात की तर्ज पर हर रोज बड़ी संख्या में मवेशी भरे वाहन पास कराए जा रहे हैं। तस्करी में एक बर्खास्त सिपाही का नाम आने से पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है।
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सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली तो कुछ दिनों के लिए तस्करी पर लगाम लगी थी, लेकिन ढाक के तीन पात वाली कहावत फिर चरितार्थ हुई। हाईवे पर शाम ढलते ही मवेशियों से भरे वाहन निकलने शुरू हो जाते हैं। कोड वर्ड के सहारे उन्हें आगे बढ़ाया जाता है। तस्करी में संलिप्त मास्टरों के मायाजाल के आगे सबकुछ फेल हो जा रहा है। गो तस्करी के मामले में कुछ माह पूर्व कानपुर के चकेरी थाने से गिरफ्तार बर्खास्त सिपाही सुशील कुमार पुत्र राम आसरे निवासी सोरांव इलाहाबाद का नाम आने से पुलिस महकमे में गहमागहमी बढ़ गई है। पुलिस सूत्रों की मानें तो सिपाही के अलावा पशु तस्कर चांद मोहम्मद पुत्र हिदायत दौलतपुर सैनी कौशांबी पूरा नेटवर्क तैयार करता है। जिस पर चंदौली, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर समेत कई प्रांतों में केस दर्ज है। दोनों के गठजोड़ से राजस्थान, हरियाणा से पशुओं की तस्करी कर बंगाल तक पहुंचाने का काम होता है। सूत्रों ने बताया कि यूपी 70 नंबर की छह वाहनों के माध्यम से गायों की तस्करी होती है।
अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि पशु तस्करी रोकने के लिए टीमें गठित हैं। हाइवे के सभी थानों से निगरानी रखी जाती है। अक्सर मवेशी भरे ट्रकों को बरामद किया जाता है। उन्होंने गो तस्करी की बात से इंकार किया।
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