जिले में होर्डिंग को लेकर कोई नियमावली न होने का फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं। इससे हर साल निकायों को हजारों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है। अलग-अलग निकायों में विज्ञापन के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित हैं। ठेकेदार लोगों से होर्डिंग लगाने के लिए मनमाना पैसा लेते हैं। अपने मन से नगर में कहीं भी होर्डिंग्स लगा दे रहे हैं। जिम्मेदारों को होर्डिंग्स उतरवाने की फुर्सत नहीं है। जिले में सबसे अधिक होर्डिंग निजी संस्थान, जिसमें अस्पताल और स्कूलों के हैं। गोपीगंज में 2019 से ही विज्ञापन के मूल्य लागू है, लेकिन इसका पालन भी न के बराबर हो रहा।
जिले की गोपीगंज व भदोही नगर पालिका के अलावा ज्ञानपुर, सुरियावां, घोसिया, खमरिया और नईबाजार जैसी नगर पंचायतों में कम से कम 800 से 900 होर्डिंग लगे हैं। सबसे अधिक होर्डिंग गोपीगंज और भदोही नगर पालिका क्षेत्र में लगे हैं। अब तक किसी भी निकाय में होर्डिंग्स को लेकर कोई नियमावली नहीं है। कार्रवाई तो दूर, नगरों में लगे होर्डिंग को उतारा भी नहीं जाता है। अलग-अलग निकायों में साइज के हिसाब ठेकेदार रेट तय कर होर्डिंग लगाते हैं। इसमें सबसे अधिक रेट 3000 रुपये मासिक है। खास बात है कि होर्डिंग को लेकर ठेकेदारों का यहां तक कहना है कि वे सेटिंग से सब करा देंगे। जिले भर में जगह-जगह अवैध तरीके से होर्डिंग-बैनर लगने से नगर की प्रभावित सुंदरता होती है।। बीते 10 साल में जिला पंचायत, लोकसभा, विधानसभा औन निकायों में कुल सात से आठ बार चुनाव हुए हैं। हर बार जब चुनावी अधिसूचना जारी होती है तो प्रशासन नगरों व गांवों में लगे होर्डिंग बैनर पर कार्रवाई करता है। इस दौरान अभियान चलाकर होर्डिंगों को उतारा जाता है। जिले में होर्डिंग लगाने की कोई नियमावली न होने से होर्डिंग ठेकेदरार इसका फायदा उठाते हैं। इसमें कुछ केवल होर्डिंग लगाने का काम करते हैं तो कुछ होर्डिंग बनाने और लगाने दोनों काम करते हैं। इनके अलग-अलग रेट भी हैं। भदोही में जहां महीने का रेट तय है। वहीं गोपीगंज होर्डिंग बैनर महीनों लगे रहते हैं। ठेकेदार होर्डिंग बैनर के साथ डीजल, गाड़ी और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च भी खर्च विज्ञापन दाता से लेते हैं। गोपीगंज में मिर्जापुर तिराहे के पास एक निजी संस्थान फिक्स पोल लगाया है। संस्थान की ओर से हर माह पालिका को दो हजार रुपये भुगतान किया जाता है। इसके अलावा पूरे नगर में कम से कम संस्थान ने 25 से 30 होर्डिंग-बैनर लगाए हैं। गोपीगंज अधिशासी अधिकारी रामबचन यादव ने बताया कि 2019 में पालिका ने प्रस्ताव पारित किया है। जिसमें तीन बाई तीन फीट के होर्डिंग्स का 900 रुपये मूल्य निर्धारित है। वहीं राजमार्ग के पिलरों पर 10 बाई 15 फीट के होर्डिँग्स का मूल्य 866 रुपये महीना और 10 हजार 392 रुपये सालाना शुल्क है। बोर्ड बनवाने का शुल्क संस्था को वहन करना पड़ता है। पिलर पर होर्डिंग लगाने की अनुमति मिलती है, लेकिन इस नियम का अब तक पालन नहीं हो सका। दूसरी तरफ भदोही ईओ धर्मराज सिंह ने बताया कि होर्डिंग बैनर को लेकर जल्द ही नियमावली बनाई जाएगी।