रेलवे स्टेशन पर लगे कोच संकेतक करीब डेढ़ साल से कोच नंबर नहीं दर्शा रहे हैं। ऐसे में आ चुकी ट्रेन में निर्धारित कोट में चढ़ने को लेकर भगदड़ मचती है। लोगों ने रेलवे अधिकारियों से इसे दुरुस्त कराने की मांग की है।
करोड़ो रुपये खर्च कर भदोही रेलवे स्टेशन का सुंदरीकरण तो कर दिया गया, लेकिन अभी भी कुछ बुनियादी सुविधाएं ऐसी हैं जो यात्रियों को नहीं मिल पा रही हैं। इनमें एक कोट संकेतक भी है। जो आने वाली ट्रेन की कोट संख्या को दर्शाता है। जिससे यात्री आसानी से अपने कोच में सवार हो जाता है। लेकिन करीब डेढ़ साल से यह संकेतक काम नहीं कर रहे हैं। जिससे यात्रियों को ट्रेन में अपने कोच में चढ़ पाना मुश्किल हो रहा है।
सोमवार को नगर के शमशेर खां बड्डे अपनी बेटी को नीलांचल एक्सप्रेस पर बैठाने गए थे। उनका बर्थ बी-2 सात नंबर था। काफी हाथ पैर मारने के बाद भी कोच कहां होगा उन्हें पता नहीं चल सका और वे प्लेटफार्म पर आगे की ओर खड़े रहे। जब ट्रेन आई तो बी-2 बोगी 10 डिब्बे पीछे की ओर होने से आगे खड़े लोग पीछे और पीछे खड़े लोग आगे की ओर भागने लगे। हाल यह हो गया कि कई लोगों को दूसरे डब्बों में चढ़ना पड़ा। शमशेर खां ने कहा कि लाखों रुपये की लागत से कोच गाईडेंस सिस्टम का ढांचा खड़ा किया गया और लगभग डेढ़ वर्ष हो जाने के बाद भी इसे सिस्टम से जोड़ा नहीं जा सका है। निश्चित ही किसी दिन बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। शायद हादसे के बाद रेल अधिकारी चेतें। डीआरएम उत्तर रेलवे, लखनऊ, सुरेश कुमार सपरा ने बताया कि भदोही में उच्चीकृत रेल कोच गाईडेंस सिस्टम लगा हुआ है। जो नेशनल ट्रेन इनक्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) से जुड़ा होना चाहिए। यह पूरी तरह स्वचालित है। यह अब तक क्यों नहीं चल रहा है। इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर इसे चालू कराया जाएगा।