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...साहब हमें कब मिलेगा आवास

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वहिदानगर। गरीबों को जनसुविधाएं मुहैया कराने के केंद्र और प्रदेश सरकार के दावे यहां हवा होते दिख रहे हैं। तटवर्ती गांव डीघ की वनवासी बस्ती में इसकी बानगी देखने को मिली है। यहां तीन दर्जन से अधिक परिवारों को मड़हे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। कोई अधिकारी गांव में जाता है तो वे यही पूछते हैं कि साहब हमें कब आवास मिलेगा।
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बस्ती के नवमीलाल, संतोष, उमेश, नेब्बूलाल, गोरेलाल, विनोद, भाईलाल, कमलेश, जीतलाल, महेंद्र, दिनेश, रमेश, कैलाश, सवितारा, ममता देवी, शांति देवी, जयराजी, लालती देवी, गीता देवी, सोना देवी, संगीता देवी, सरोजा देवी आदि का आरोप है कि गत दो पंचवर्षीय योजनाओं से ब्लॉक और जिला स्तरीय अधिकारियों से आवास के लिए गुहार लगाई जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। बस्ती में तीन-चार लोगों को आवास देकर अन्य लोगों को उपेक्षित कर दिया गया। बारिश के दिनों में मड़हे का आसरा भी दगा देने लगता है। बस्तीवासियों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्थलीय निरीक्षण कराकर आवास मुहैया कराने की गुहार लगाई गई है। परियोजना निदेशक मनोज कुमार राय ने कहा कि पात्रों का चयन सेक्रेटरी और प्रधान को करना है। अगर बस्ती के मुसहरों को आवास नहीं मिला है तो उन्हें दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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