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सर्दी, खांसी, निमोनिया, कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे बच्चे

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ठंड और गलन बढ़ने का ज्यादा असर पर बच्चों पर देखने को मिल रहा है। तापमान में लगातार गिरावट से गलन बढ़ गई है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही से बच्चे, बड़े, बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, कोल्ड डायरिया की चपेट में बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। इसलिए चिकित्सकों ने मां व अभिभावकों को बच्चों की अच्छे से देखरेख करने की सलाह दी है।
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गलन बढ़ने से बच्चों के बीमार होकर सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचने का सिलसिला तेज हुआ है। बच्चे मौसम में हुए बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार, कोल्ड डायरिया, निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। कमोवेश यही हाल निजी अस्पतालों में भी है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि सर्दियों में दिन और रात का तापमान लगातार गिर रहा है। इसकी वजह से बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सर्दियों में बच्चों की इम्युनिटी सामान्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक कमजोर हो जाती है। उसके चलते वे जरा सी लापरवाही पर बच्चों में सांस की बीमारी, सर्दी, खांसी, निमोनिया कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। प्रतिदिन जिला अस्पताल में बीमारी से पीड़ित 20 से 25 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। बाल रोग विशेष डॉ. विनोद शर्मा ने बताया है कि इस मौसम 50 से 60 प्रतिशत बच्चेे कोल्ड डायरिया, सांस की बीमारी, निमोनिया, सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित देखे जा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि मौसम में परिवर्तन से कोल्ड डायरिया, सांस की बीमारी, निमोनिया, सर्दी, जुकाम, खांसी के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस मौसम में बच्चों के खान-पान व रहन सहन पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों को सुझाव दिया कि बच्चों को सुबह बेड से उठकर सीधे बाहर न जानें दें। गुनगुना पानी पिलाएं, गर्म कपड़े पहनाएं। ठंड चीजों से परहेज करना चाहिए। इससे बच्चों को मौसमी बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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