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कुपोषित 19 हजार बच्चों को बचाना चुनौती

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ज्ञानपुर। वैश्विक महामारी कोरोना की रफ्तार अब धीरे-धीरे कम हो रही है। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रयास रंग ला रही है। इस संकट से उबरते लोगों में अब तीसरी लहर की चिंता सताने लगी है। जिसमें बच्चों को ज्याद खतरा बताया जा रहा है। जिले में 19000 बच्चें अति कुपोषित और कुपोषित है। ऐसे में इन बच्चों के स्वास्थ्य पर अगर समय से ध्यान नहीं दिया गया तो कोरोना की तीसरी लहर इनके लिए घातक हो सकती है।
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जिले में कोरोना की दूसरी लहर से अभी निजात नहीं मिल पाई है। ऐसे अब विशेषज्ञ तीसरी लहर की आशंका जताने लगे हैं। जुलाई और अगस्त में इसके आने की अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की सारी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ तीसरी लहर को खास तौर पर बच्चों के लिए खतरनाक बता रहे हैं। इसके बावजूद भी जिले में कुपोषण के शिकार बच्चों को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। प्रशासन के आंकड़े के मुताबिक जिले में 13000 बच्चे कुपोषित है। वहीं 6,500 बच्चे अति कुपोषित के श्रेणी में है। इन बच्चों के स्वास्थ्य पर समय से ध्यान नहीं दिया गया तो तीसरी लहर में इन्हें कोरोना से बचना बड़ी चुनौती होगी। अधिकांश कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चे गरीब परिवारों से है। उन्हें पौष्टिक आहार देने के साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग की है। इलाज करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। लेकिन दोनों विभागों ने कोरोना काल में चुप्पी साध ली है।
पुष्टाहार मिलने की योजना जहां धड़ाम हो गई है। वहीं महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में एक भी बच्चा भर्ती नहीं है। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने अब तक कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर इलाज करने के लिए कोई तैयारी नहीं की है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में स्थित पुनर्वास केंद्र में अप्रैल माह में कुछ बच्चे भर्ती थे। उसके बाद से केंद्र बंद पड़ा है। अब वहां के डॉक्टर और कर्मचारियों की अन्य जगहों पर ड्यूटी लगा दी गई है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया है कि कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुर्नावास केंद्र है। यहां मरीजों को भर्ती कर समुचित इलाज की व्यवस्था की गई है। ओपीडी बंद होने और कोरोना के डर की वजह से लोग बच्चों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।
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