जिले में दो माह से 46 क्रय केंद्रों पर शुरू हुई धान खरीद विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों में सुर्खियों में है। केंद्र प्रभारी बिचौलियों पर मेहरबान होकर गांव-गांव उनसेे सस्ते दर पर खरीदारी कराकर देर शाम तक केंद्रों पर समर्थन मूल्य देकर लघु एवं सीमांत किसानों के उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। इसका उदाहरण भी बृहस्पतिवार को सुबह करीब 10 बजे जंगीगंज रेलवे स्टेशन के पश्चिमी फाटक संख्या 45सी पर उस समय देखने को मिल गया जब लोगों की नजर बिचौलियों के एक वाहन में सरकारी बोरियों में भरा धान मिल गया।
किसान शीतला प्रसाद, सत्यजीत दुबे, अमरेश पटेल ने विपणन विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि ब्लॉक औराई, भदोही, सुरियावां, डीघ, अभोली में सहयोगी संस्थाओं के साथ केंद्रों का निर्धारण कर धान की खरीद तो शुरू करा दी गई, लेकिन किसानों के लिए बोरे का इंतजाम नहीं कराया जा सका। यही कारण है कि छह से आठ किलोमीटर दूर से ट्रैक्टर, पिकअप जैसे वाहनों पर महंगा किराया देकर धान लाते हैं। केंद्र पर तैनात अधिकारी व कर्मचारी सत्यापन रिपोर्ट, धान में नमी, स्वच्छता को परखकर टोकन देते हैं। उक्त टोकन का नंबर कब आएगा कोई नहीं जानता। जबकि बिचौलिए उन्हीं किसानों के बीच केंद्रों पर उपस्थिति दर्ज कराकर सरकारी बोरे भी हासिल कर लेते हैं और किसान एक क्विंटल धान बेचने के लिए 300 रुपये बोरे खरीदने के नाम पर खर्च करने पर विवश होते हैं। किसान शिवसागर, आदित्यनाथ, सत्यनाथ, कृपाशंकर ने बताया कि केंद्र प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह तब होता है जब प्लास्टिक की बोरियों में धान लाकर किसानों को जूट की बोरियां खरीदने के लिए विवश किया जाता है। जो किसान आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं वह आनन-फानन में व्यवस्था कर बाजी मार लेते हैं और जिस किसान के पास यह व्यवस्था नहीं होती है, उसका नंबर 10-12 दिनों के लिए पीछे कर दिया जाता है। डिप्टी आरएमओ देवेंद्र सिंह से सवाल करने पर उन्होंने बताया कि केंद्रों पर उपलब्ध नए बोरे सिर्फ चावल को भरने के लिए हैं। मिलर्स से बोरा मिलने पर किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। प्रति माह कोटे की दुकानों से खाली होने वाला 1.60 लाख बोरा आखिरकार बाजार में ही पहुंचता है, जहां से बिचौलिए व किसान खरीद सकते हैं। गांव-गांव सस्ते दर पर हो रही धान खरीद का मामला तभी रुक पाएगा, जब मंडी परिषद को अधिकार मिलेगा।