जिले में वरुणा के संरक्षण के लिए कई अभियान चलाए गए। इसके तहत नदी किनारे पौधरोपण कराया गया और ड्रोन सर्वेक्षण भी किया गया। करीब एक वर्ष पहले डेनमार्क की दो सदस्यीय टीम भी पहुंची थी। टीम ने सर्वेक्षण कर वरुणा के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना बनाई। ये अभियान कागजों तक ही सीमित रहे और धरातल पर इनका असर दिखाई नहीं दिया। वरुणा में जमा हो रही गाद और सिल्ट के कारण अब नदी का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है।
127 करोड़ से बनना है एसटीपी प्लांट
जिले में वरुणा, गंगा और मोरवा नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए 127.26 करोड़ रुपये की लागत से तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना से न केवल दूषित जल शुद्ध होगा, बल्कि स्थानीय किसानों और शहरवासियों को भी राहत मिलने की बात कही गई है। साथ ही नदी को पुनर्जीवन मिलने की उम्मीद है।