कालीन नगरी में सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही यहां का बर्मी कंपोस्ट खेतों में फसलों को लहलहाने में मदद करेगा। इसके लिए पशुपालन और कृषि विभाग ने संयुक्त रूप से प्रयास शुरू कर दिया है। प्रायोगिक तौर पर फुलवरिया के गोवंश आश्रय स्थल में बर्मी कंपोस्ट बनाने की शुरूआत कर दी गई है। जल्द ही यहां की खाद को एक और दो किलो के पैकेट में भरकर कृषि विभाग से लाइसेंस प्राप्त खाद और बीज की दुकानों के माध्यम से बेचा जाएगा। इससे एक तो खेती की लागत कम होगी, दूसरे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
बीते सोमवार को बर्मी कंपोस्ट बनाने का शुभारंभ करने के बाद प्रभारी खंड विकास अधिकारी जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार प्रजापति ने बताया कि फुलवरिया में प्रयोग के तौर पर यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि खाद बनाने के लिए टैंक में तीन किलो केंचुए डाले गए हैं। यहां तैयार खाद एक और दो किलो के पैकेट में उपलब्ध करायी जाएगी। गोशाला में तैयार खाद के पैकेट कृषि विभाग की लाइसेंसी दुकानों पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह खाद नर्सरी, किचेन गार्डन, सब्जी की खेती करने वाले किसानो ंऔर आम जन को दी जाएगी। यहां प्रयोग सफल रहने पर जिले के अन्य हिस्सों में भी यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फुलवरिया में 90 से अधिक गोवंश हैं। इनके गोबर से बर्मी कंपोस्ट बनाया जाएगा। इससे कई लाभ होंगे। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जब दुकानों के माध्यम से बर्मी कंपोस्ट बेचा जाएगा तो गोशाला की आय भी बढ़ेगी। एक किलो वाला पैकेट पांच रुपये और दो किलो वाला पैकेट आठ से दस रुपये में मिलेगा। इससे जो आय होगी, उससे पशुओं के चारे का इंतजाम किया जाएगा। इससे पशु स्वस्थ रहेंगे। साथ ही बर्मी कंपोस्ट जब खेतों में डाला जाएगा तो उससे उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।