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कालाबाजारी: 600 रुपये का स्टांप 1300 में

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ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण काल में ठप पड़ी रजिस्ट्री का कामकाज अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पटरी पर आने के साथ ही स्टांप की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। दोगुने दाम पर स्टांप की बिक्री हो रही है। इससे स्टांप खरीदने वालों की जेब ढीली हो रही है। रजिस्ट्री ऑफिस परिसर में स्टांप वेंडर जमकर खेल कर रहे हैं।
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कोरोना वायरस के कारण साढ़े तीन महीने तक लॉकडाउन रहा। अनलॉक एक से राजस्व के लिए रजिस्ट्री दफ्तर खुल गए, लेकिन शुरुआत में जमीन की खरीद-फरोख्त कम हुई। जैसे-जैसे स्थिति बेहतर हुई रजिस्ट्री भी तेज हो गई। जमीन की खरीद तेज होने पर स्टांप की कालाबाजारी भी शुरू हो गई। स्टांप वेंडर दोगुने दाम पर स्टांप को बेच रहे हैं। इससे जमीन लिखाने के लिए आने वाले लोगों को आर्थिक चपत लग रही है। बृहस्पतिवार को रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे डीघ के दानीपट्टी निवासी संतोष कुमार ने बताया कि जरूरी काम के लिए 500 का स्टांप लेना था, जो एक हजार रुपये में मिला। कोल्हण के रामसूरत ने भी आरोप लगाया कि स्टांप वेंडर कालाबाजारी कर रहे हैं। कालाबाजारी के शिकार यह दोनों ही नहीं हुए। यह तो केवल बानगी भर है। ज्यादा परेशानी 100 और 50 रुपये के स्टांप लेने में आ रही है। छोटे स्टांप पर अधिक दाम वसूला जा रहा है। उप निबंधक ज्ञानपुर शरतेंदु मिश्र ने कहा कि अभी तक किसी भी उपभोक्ता ने अधिक दाम पर स्टांप बिकने की शिकायत नहीं की है। अगर ऐसा हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
स्टांप लेने की प्रक्रिया जटिल हुई
ज्ञानपुर। पहले के मुकाबले स्टांप लेने की जटिल हुई प्रक्रिया से बचने के लिए भी वेंडर ज्यादा मुनाफाखोरी के चक्कर में पड़ गए हैं। एक वेंडर ने बताया कि पहले कोषागार में परची के साथ पैसे जमाकर सीधे स्टांप ले लिया जाता है। अब ट्रेजरी में स्टांप के लिए अर्जी लगाने के बाद वहां के हेड की मुहर लगवाकर बैंक में चालान जमा कराना पड़ता है। इसके बाद दोबारा ट्रेजरी जाकर स्टांप लेना पड़ता है। ऐसे में स्टांप मिलने में दो दिन का वक्त लग जाता है। यही वजह है कि पहले की अपेक्षा वेंडरों के पास स्टॉक में कम स्टांप हैं।
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