औराई। चावल कारोबारी शिव कुमार की हत्या के बाद धान और चावल के सिंडिकेट का चक्रव्यूह धीरे-धीरे सामने आ रहा है। कमीशन के काले कारोबार का जाल मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक फैला है। सस्ते दर पर चावल और धान की खरीद कर मिलरों के यहां पहुंचता है। यहां से कमीशन तय होकर दलालों तक पहुंचता है। प्रशासन की ओर से सख्ती की गई तो कइयों की गर्दन फंसनी तय है।
जिले के सरकारी क्रय केंद्रों पर लक्ष्य से अधिक धान की खरीद हो चुकी है लेकिन अब भी किसान धान बेचने के लिए भाग दौड़ लगाए हुए हैं। शासन से तय है कि एक किसान से केवल साठ कुंतल ही धान खरीद की जाए। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ राइस मिलरों ने बाहर के चावल खरीद कर और उसे सरकारी बोरे में पैक कर एफसीआई के गोदामों तक पहुंचा दिया। औराई समेत कई राइस मिलर बिहार और मध्य प्रदेश से आने वाले चावलों की खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं जबकि धान की कुटाई उनके यहां नाम मात्र की हो रही है। प्रशासन की ओर से औचक छापेमारी की जाए तो निश्चित है कि दूसरे प्रांत की चावल लदी गाड़ियां अवश्य मिल जाएंगी। सफेद चावल को काला करने में जहां कुछ मिलरों की भूमिका अहम है वहीं चावल और धान की दलाली करने वाले लोग भी तालमेल बैठाकर काम कर रहे है। आखिर मिलर इसके पीछे जाएं क्यो नहीं। बिहार और मध्य प्रदेश से धान जहां 12 से लेकर 15 रूपये किलो मिल जाता है तो वहीं चावल भी 20 तक खरीदा जाता है। करीब तीन से छह रूपये प्रति किलो अधिक पर धान तो चावल भी अधिक कीमत पर गोदामों में पहुंच जाता है। प्रतिकिलो होने वाली बचत राइस मिलर से लेकर बिचौलिए लेते है। बैंकों के खातों को खंगाला जाए तो ऐसे कई अकाउंट मिलेंगे जिनके पास एक धूर जमीन तक नहीं है। ऐसे खाते में 100 से लेकर 300 कुंतल तक के धान का पैसा पहुंच रहा है। शिव कुमार गुप्ता पकड़े गए आरोपी को ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उसे अपना खरीदा गया चावल दिया और वह जाकर अपने माध्यम से किसी मिलर को दे दिया। जिसका पैसा शिवकुमार पकड़े गए आरोपी से प्राप्त करना चाहता था, जिसका खामियाजा उसकी हत्या के रूप में सामने आई।