भदोही। कोरोना से धीरे-धीरे उबर रहे भदोही के कालीन उद्योग को अब नए कोरोना स्ट्रेन ने बेहाल कर दिया है। ब्रिटेन के लिए सभी उड़ानों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए जाने से कालीन की सप्लाई ठप हो गई है। इसे लेकर भदोही के कालीन कारोबारी चिंतित हैं। उन्हें डर है यदि अगले दो सप्ताह में ब्रिटेन में हालात सामान्य नहीं हुए तो सैकड़ों करोड़ों की कालीनें गोदामों में ही डंप रह जाएंगी।
गोपीगंज के प्रमुख कालीन निर्यातक व कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रशासनिक समिति के सदस्य संजय गुप्ता का ब्रिटेन से करीब 100 करोड़ सालाना का कारोबार है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में क्रिसमस पर हमारे कालीनों की खरीदारी अधिक होती है। लेकिन मौजूदा समय में वहां पूर्ण लॉकडाउन होने से न तो लोग ठीक से त्योहार मना सके ना ही खरीदारी हुई है। क्रिसमस की सेल के लिए क्रिसमस पूर्व जो आर्डर मिलते थे वे इस वर्ष कोरोना स्ट्रेन की भेंट चढ़ गए हैं। अगर अगले एक सप्ताह या दस दिन में स्थिति सुधरी तो संभव है कि बाजार में सुधार हो लेकिन यदि ऐसा न हुआ तो निश्चित रूप से समस्या बढ़ेगी।
आल इंडिया कारपेट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के उपाध्यक्ष तनवीर हुसैन अंसारी ने कहा कि कोरोना के नए स्ट्रेन के चलते भारत सहित विश्व के 30 से अधिक देशों ने ब्रिटेन को अलग थलग कर दिया है। उड़ानें रद्द कर दी गई हैं इससे समझा जा सकता है कि इंग्लैंड को होने वाले कालीन निर्यात पर असर पड़ना तय है। क्रिसमस पर खरीदारी नहीं हो सकी है। यदि दो सप्ताह में कोरोना की नई प्रजाति से पार नहीं पाया गया तो आर्डर रद्द तो होंगे ही कालीन उत्पादन भी रोकना होगा।
उधर, भदोही के उद्यमी इसलिए भी चिंतित हो उठे हैं क्योंकि अगले माह 27 जनवरी से वर्चुअल कारपेट फेयर प्रस्तावित है। इसकी तैयारियों के बीच यदि कोरोना से निजात नहीं मिली तो 12 हजार करोड़ का कालीन कारोबार को अभी और समस्याओं से दो चार होना पड़ सकता है।
10 हजार करोड़ से कम रह सकता है निर्यात
भदोही। बीते मार्च से लेकर 30 जून तक देश में संपूर्ण लॉकडाउन झेलने के बाद कालीन कारोबारियों को व्यवसाय के फिर से पटरी पर आने की उम्मीद थी। धीरे-धीरे वर्ष का अंत आ गया किंतु कारोबार पटरी पर नहीं आ सका। अब ब्रिटेन और जर्मनी में जब फिर से स्थिति बिगड़ती दिख रही है। ऐसे में कालीन कारोबार के दस हजार करोड़ पार करना भी कठिन दिख रहा है।
वर्ष 2018-19 में भारत का निर्यात 12364.69 करोड़ था। लेकिन 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में निर्यात घटकर 11799.46 करोड़ रह गया। इस कमी का कारण कोरोना का प्रकोप माना गया। चालू वित्त वर्ष में अब महज 3 महीने शेष रह गए हैं। अप्रैल से ठप कालीन उत्पादन और निर्यात की स्थिति पर गौर किया जाए तो इस वर्ष निर्यात 10 हजार करोड़ के पार कर जाना भी मुश्किल दिखाई पड़ रहा है।