ज्ञानपुर। परिषदीय विद्यालयों में बाल संसद और मीना मंच का गठन किया जाएगा। इसमें छात्र-छात्राओं को विद्यालय में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताया जाएगा। उनमें जिम्मेदारियों का भाव जगाया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक का पत्र आते ही बेसिक शिक्षा विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर इसको अप्रैल में ही प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित है। इनमें प्रार्थना, योग, व्यायाम, स्वच्छता, कक्षा की क्रियाएं, अनुशासन, मध्याह्न भोजन वितरण व्यवस्था, मीना की कहानियां एवं पुस्तकालय की किताबों का वितरण आदि क्रियाकलाप शामिल है। बाल संसद का गठन सभी विद्यालयों में किया जाना है जबकि मीना मंच सिर्फ पूर्व माध्यमिक विद्यालय में गठित होगी। बाल संसद में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री के अलावा सात मंत्री मंडल होंगे। इसका नेतृत्व मंत्री और उप मंत्री करेंगे। प्रत्येक सदन में मंत्री और उप मंत्री के अतिरिक्त चार सहयोगी सदस्य होंगे। जिनमें दो बालक व दो बालिकाएं होंगी। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि बाल संसद विद्यालय के बच्चों का एक मंच है। इसका उद्देश्य बच्चों में नेतृत्व और निर्णय लेने और जिम्मेदारियों का भाव उत्पन्न करना है। साथ ही विद्यालय गतिविधियों व प्रबंधन में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए विद्यालय को सुरक्षित व साफ सुथरा रखना है। उन्होंने बताया कि परियोजना निदेशक का पत्र आया है। जिसको अमल में लाया गया है। अप्रैल में ही इसको प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है।
इनसेट
बाल संसद का गठन और कार्य
- विद्यालय के बच्चों को सात सदनों में विभाजित करना।
- प्रत्येक सदन में एक प्रमुख और एक सह प्रमुख होगा।
- प्रमुख और सह प्रमुख का चयन बच्चे करेंगे।
- प्रत्येक सदन में हर कक्षा के छात्र प्रतिभाग करेंगे।