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माइनरों का बुरा हाल, सैकड़ो बीघे खेती परती

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ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से जुड़ी नहरों और माइनरों का बुरा हाल है। मुख्य नहर सहित डीघ रजवाहा, बारीपुर माइनर, सीतामढ़ी माइनर आदि नहरों में टेल तक पानी कभी नहीं पहुंचा। जिसके कारण सैकड़ों बीघे रकबे में खेती नहीं होती। साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर हर साल आठ से 10 लाख रुपये खर्च होता है, लेकिन नहरें में झाड़ियां जस की तस हैं।
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ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से भदोही ही नहीं मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी जिले में सिंचाई होती है। हर साल नहरों की साफ-सफाई और उपकरणों की मरम्मत के लिए शासन से बजट आता है, लेकिन जिले में सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। कोनिया के किसानों का आरोप है कि 20 किमी लंबी डीघ रजवाहा नहर में टेल तक पानी कभी नहीं पहुंचता है। जसवां लमाही से भुर्रा छेछुआ तक दर्जनों गावों के किसानों की हजारों बीघे खेतों की सिंचाई का एक मात्र साधन डीघ रजवाहा नहर है। 35 वर्षों पूर्व बनी नहर अपने सिंचाई लक्ष्य के नजदीक भी नहीं पहुंच पाती है। विभागीय लापरवाही के कारण कोनिया के किसानों की अति उपजाऊ जमीनें परती रह जाती है। अधिशासी अभियंता पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि नहरों की सफाई नवंबर में होती है। खरीफ के सीजन में सिल्ट सफाई नही होती है। उम्मीद के हिसाब से बजट नहीं मिलता, जिससे सभी माइनर और नहर की सफाई संभव नहीं होता।
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