फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं गायब

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत सात सौ से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोरोना महामारी के दौर में एंटीबोयोटिक दवाओं का अभाव हो चुका है। वहीं निजी अस्पताल संचालक सीमित व्यवस्था में काम चला रहे हैं तो सर्दी, खांसी, निमोनिया, पेट दर्द, सांस, दमा, मलेरिया, टायफाइड, शुगर, शिशु रोग से जुड़ी दवाएं बढ़े दर लेने के लिए मरीज हलाकान हैं। बावजूद इसके औषधि प्रशासन का शिकंजा उन निजी अस्पतालों पर नहीं कस सका जो रोग विशेषज्ञ के रुप में संचालित होकर अंदर ही मेडिकल चला रहे हैं।
विज्ञापन

दरअसल ज्यादातर मेडिकल स्टोर पर लाइलाज रोगों के इलाज से लेकर प्रसव तक की दवाइयां बेची जा रहीं हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स संचालक मौसम के उतार-चढ़ाव का लाभ लेने से नहीं चूक रहे हैं। शुक्रवार की देर शाम तक नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के छोटी-बड़ी बाजारों में कार्यरत मेडिकल स्टोर, निजी अस्पताल तक की भीड़ को महामारी का भय नहीं दिखा। इसका कारण यह भी रहा कि तीन सप्ताह से महामारी का असर चार गुना तेज होने से पॉजिटिव आने वालों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकारी अस्पताल हो या निजी अस्पताल हर जगह अॅाक्सीजन जब तक उपलब्ध है तब तक संक्रमित मरीज सांस लिए उसके बाद उनका शव ही बाहर आते रहे। यह भी नहीं है कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी तरह की कमी है बावजूद इसके न अस्पतालों में बेड खाली हैं न अॅाक्सीजन के सिलिंडर।
साफ तौर पर यह कहते हुए मरीजों को भर्ती लेने से इनकार किया जा रहा है कि अस्पताल में जगह नहीं है। मरीज तो मरीज, अस्पताल और मेडिकल स्टोर चलाने वाले दवाओं को उपलब्ध कराने में पसीना इस लिए छोड़ रहे हैं कि उनकी मांग पर कंपनियंा और थोक विक्रेता दवाएं उतना ही देने के लिए राजी हो रही हैं जितने से काम चल सके। मरीज राजकुमारी देवी, उर्मिला देवी, किरन देवी ने बताया कि लॉकडाउन होने के बाद भी एक सप्ताह के बच्चे को दवा लेने आना पड़ा। डाक्टर दवाएं लिख रहे हैं तो मेडिकल पर मिल नहीं रही है। जो मिल रही है वह दूसरी कंपनी की और आधी-अधूरी। अस्पताल संचालक देवेंद्र सिंह, कृष्णा सिंह, मेडिकल स्टोर चलाने वाले अरविंद कुमार, सुशील कुमार, त्रिवेणी सिंह ने कहा कि 10 खुराक की जगह पांच खुराक देना मजबूरी है। विवशता है कि दवा मंडी प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर से दवाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं उपलब्ध हो रही है। ड्रग प्रभारी एके बंसल ने कहा कि महामारी के दौर में एक साथ बढ़ी दवाओं की मांग पर यह समस्या आई है। दवाओं को उचित दर में उपलब्ध कराने के लिए नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें