ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गोवंश संरक्षण में बजट के अभाव के चलते अब बेजुबानों की सेहत बिगड़ रही है। पशुपालन विभाग के बहीखाते में कार्यरत 25 अस्थायी और एक स्थायी गोशालाओं के रखरखाव का शेड्यूल भी बिगड़ जाने से प्रतिदिन हो रही दो-चार मौतों से संख्या घटने में देर नहीं लग रही।
विभागीय बहीखाते में 3300 से अधिक छुट्टा पशुओं का संरक्षण और अब तक खर्च हो चुके लगभग 10 करोड़ रुपये का डाटा कहीं से किसी के गले नहीं उतर रहा है। इसके अलावा गोशालाओं में बजबजा रही गंदगी, भूसे की कमी, छाजन, पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं जिला स्तरीय संरक्षण समिति पर सवाल उठाने लगी है। वहीं दुर्दशा पर कटाक्ष करने वालों ने कहा कि तीन वर्ष आदित्यनाथ योगी ने प्रदेश की कमान संभाल कर प्रथम वरीयता छुट्टा पशु संरक्षण को दिया था। फसलों की बर्बादी रोक कर किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सभी जिलों में अस्थाई गोशाला में आने वाले खर्च में किसी तरह की कमी न आने का वादा कर जिलेवार बजट का आवंटन शुरू करा दिया।
ब्लाक औराई, डीघ, अभोली, भदोही, सुरियावां और ज्ञानपुर के विभिन्न गांवों में सर्वेक्षण कराकर संरक्षण समिति ने पशुपालन विभाग के साथ अस्थायी गोशालाओं का संचालन भी शुरू कराया। लेकिन जैसे-जैसे अस्थायी गोशाला में पशुओं की संख्या बढ़ती गई वैसे-वैसे चारा-पानी के नाम पर प्रति पशु 30 रुपये और रखरखाव की जिम्मेदार मनरेगा पर निर्भर कर दिया। काफी उठापटक के बाद संबंधित ग्राम प्रधान, ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने पशुओं को उचित संरक्षण देने में तेजी दिखाई। वित्तीय वर्ष 2019 से 21 तक छह करोड़ रुपये भुगतान भी करा लिया। स्थायी गोशाला के लिए पिपरसि में सवा करोड़ खर्च हुआ लेकिन दूसरा स्थायी गोशाला नगर पालिका भदोही के अधीन होने के कारण अभी तक पूर्ण नहीं हो सका। धीरे-धीरे खर्च की सीमा 10 करोड़ तक पहुंच गई लेकिन ज्ञानपुर के रजा क पुरा-चकवा, डीघ के फुलवरिया, भावापुर, अभोली के असईपुर, भानीपुर, आनंदडीह, सुरियावां के उगईपुर, औराई के चीनी मिल परि सर, भदोही के पिपरिस की हालत अत्यंत नाजुक स्थिति में होने से संरक्षण लेने वाले पशु अंतिम सांस गिनने के लिए मजबूर हैं।
इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.जय सिंह ने बताया कि तीन माह से पांच करोड़ रुपये की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है जिसके मिलने पर संकट दूर होगा। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने कहा कि रखरखाव और इलाज के सवाल पर कहा कि कोरोना संक्रमण की महामारी होने के बाद भी बराबर निगरानी रखी जा रही है। मई के अंतिम सप्ताह तक गांव की सरकार का गठन हो जाएगा उसके बाद मनरेगा अंतर्गत आने वाले कार्य रुटीन पर दिखेंगे।
जिले में कार्यरत लगभग 25 अस्थाई गोशालाओं में तीन माह में 80 और स्थायी गोशाला में 20 पशुओं की मौतें हो चुकी हैं। ज्ञानपुर के रजाकपुरा, अभोली के मसुधी, सुरियावां के उगईपुर, डीघ के भावापुर, फुलवरिया, औराई के चीनी मिल परिसर में प्रति माह मौतें दो से सात की संख्या में है। विरोध की आवाज उठने पर जिम्मेदारी उठाने वालों ने आंकड़े को छिपाकर अन्य क्षेत्रों में हुई मौत को दिखा दिया जिसका असर न पशुपालन विभाग पर हो रहा है और न ही संरक्षण समिति पर। ऐसे में मौत का मुख्य कारण कोरोना संक्रमण काल में गोशाला को उपेक्षित छोड़ने के साथ पशुपालन विभाग में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगना सामने आया है। इस संबंध में सीवीओ डा.जय सिंह ने कहा कि उनकी ओर से न चारा-पानी की कमी छोड़ी गई थी न इलाज की।