भदोही। डीएम शैलेष कुमार के निर्देश पर शुक्रवार को आठ सदस्यीय टीम ने 12 कालीन कंपनियों के डाइंग प्लांटों का निरीक्षण किया। प्रतिष्ठानों में करीब दो घंटे तक चली जांच से कारोबारियों में खलबली मची रही। जांच टीम ने कुछ कालीन कंपनियों के डाइंग प्लांटों से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा।
भदोही, नई बाजार, गोपीगंज और खमरिया में कालीन कंपनियां हैं। हैंडमेड और टफटेड कालीनों को बनाकर उसकी धुलाई, सफाई के समय प्रयोग होने वाले विभिन्न रसायनयुक्त पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। कुछ कंपनियां इसका पालन करती हैं, लेकिन कुछ नाली के माध्यम से वरूणा और मोरवा नदी में पानी बहा देती हैं। इससे नदियों का पानी दूषित हो जाता है।
डीएम ने इसकी जांच के लिए आठ सदस्यीय टीम गठित की है। शुक्रवार को एसडीएम न्यायिक भदोही बरखा सिंह, उपायुक्त उद्योग आशुतोष सहाय पाठक, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी बीड़ा अनीता देवी, रिलेशनशिप मैनेजर राजेश, अधिशासी अभियंता भूगर्भ जल विभाग स्वप्निल कुमार राय, ईओ धर्मराज सिंह, सहायक अभियंता सिंचाई विनय प्रताप मौर्य, क्षेत्रीय वन अधिकारी आलोक रंजन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी सुशील कुमार ने मेसर्स कार्पेट इंटरनेशनल, हरियॉव, मेसर्स कार्पेट पैलेस कार्पेट सिटी, अहमदपुर फुलवरिया, मेसर्स दीपक डाइंग हाउस बीडा, मेसर्स मैंब वूलेंस जमुनीपुर, मेसर्स मीरा इंडस्ट्रीज, कार्पेट सिटी, मेसर्स रूपेश कुमार एंड ब्रदर्स,मेसर्स शोभा वूलेंस नेशनल चौराहा ज्ञानपुर रोड, मेसर्स एडीसी यार्न डायर्स, मेसर्स राधा डाईंग, मेसर्स एमकेआर (माबूद इंटरनेशनल), मेसर्स एसके डाईंग हाउस, मेसर्स अरविंद एक्सपोर्ट और मेसर्स मार्डन डाईंग हाउस की जांच की।
इस दौरान चार कालीन कंपनियों से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी की प्रयोगशाला में भेजा गया। एसडीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।