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Bhadohi News: बारिश में भी अमृत सरोवर बेपानी, झाड़ियां और सील्ट से बदरंग

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अभोली के ख्यौंखर में झाड़ियों से पटा अमृत सरोवर।  संवाद
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ज्ञानपुर। जल संरक्षण और भूजल बढ़ाने के लिए जिले में 165 अमृत सरोवर बनाए गए। हर एक पर 15 से 20 लाख रुपये खर्च हुए। लेकिन बारिश के बाद भी हकीकत कुछ और ही है। कई सरोवर में तलहटी तक पानी नहीं हो सका है। कहीं झाड़ियां उग आई हैं तो कहीं तले में सील्ट जम गई है। करोड़ों खर्च के बाद भी ये सरोवर बदरंग होकर उपेक्षा की कहानी कह रहे हैं। जिले में 546 ग्राम पंचायतें हैं। जल संरक्षण संग शहर की तर्ज पर गांव में भी पिकनिक स्पॉट तैयार करने के लिए तालाबों के सुंदरीकरण की मुहिम शुरू की गई। इसके तहत अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाने लगा। साल 2022 से शुरू हुई मुहिम में ऐसे सरोवर परिसर में न सिर्फ छायादार व फूलदार पौधे लगाए गए बल्कि परिसर में दूधिया रोशनी के साथ ही लोगों के बैठने के लिए बेंच भी स्थापित की गई।
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औसतन तालाब की लंबाई के हिसाब से आठ लाख से लेकर 15 लाख तक एक-एक सरोवर पर खर्च हुए। ग्राम पंचायतों की उदासीनता और अफसरों की अनदेखी के कारण यह सरोवर बदहाली में गुजर रहे हैं। शुक्रवार को हमारी टीम ने अभोली, डीघ और औराई के तीन से चार तालाबों की हकीकत देखी। अभोली के ख्यौंखर अमृत सरोवर के चारो तरफ झाड़ियां मिली। औराई के उमरहा की स्थिति ठीक मिली, लेकिन इसमें पानी नाममात्र का मिला। डीघ के ओझापुर में भी सरोवर बदहाल मिला। साफ-सफाई न होने से 15 अगस्त को इन सरोवर पर ध्वजारोहण करने में भी दिक्कतें हो सकती है।
जिले में अमृत सरोवरों की हालत
- बारिश के दो माह बाद भी 165 में करीब 65 में तलहटी तक पानी।
- मेंटेनेंस न होने से किनारों पर घनी झाड़ियां और कीकर उग आए।
- गाद की सफाई न होने से सरोवर उथले हो गए
अधिकतर अमृत सरोवर में पानी भरा है। कुछ ग्राम पंचायतों की उदासीनता से साफ-सफाई नहीं की गई है। 15 अगस्त से पूर्व सभी सरोवरों की सफाई करा दी जाएगी।- आदित्य कुमार, प्रभारी उपायुक्त मनरेगा
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