हिमटेक्स्टिल-2026 में भदोही के निर्यातक के स्टाल पर पुछताछ करता आयातक। स्रोत-स्वंय
भदोही। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में चार दिवसीय हिमटेक्स्टिल 2026 भारतीय कालीन निर्यातकों के लिए मिलाजुला रहा। अमेरिकी खरीदारों में टैरिफ का असर दिखा। इस कारण उम्मीद से कम खरीदार पहुंचे। यूरोपीय खरीदारों ने कुछ काम जरूर दिया है। भाग लेने वाले निर्यातकों के अनुसार फेयर अच्छा नहीं रहा। भदोही के निर्यातक राजीव गुप्ता ने बताया कि हमारे रंग बिरंगी, उत्कृष्ट डिजाइनों और रंगामेजी वाले कलात्मक कालीनों की सराहना हुई, लेकिन वैश्विक आर्थिक मंदी और कालीनों के महंगे होने का असर बिक्री पर पड़ा। ज्यादातर खरीदारों की दौड़ सिर्फ पूछताछ तक ही सीमित रही। भारतीय निर्यातकों ने कहा कि अमेरिकी बायर बल्क में खरीदारी करते हैं, लेकिन टैरिफ के असर से हमारी कालीनें 50 प्रतिशत तक महंगी हो गईं। इससे फेयर में आने वाले गिने-चुने अमेरिकी आयातक कन्नी काटते रहे। इतना ही नहीं लोग स्टॉलों पर आए, हमारी कालीनों का अवलोकन किया, लेकिन रेट बड़ी बाधा बनकर सामने आई। कुछ निर्यातक फ्रैंकफर्ट से ही स्वदेश लौट आएंगे, जबकि कुछ यूरोपीय देशों का भ्रमण करते हुए लौटेंगे। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और हनोवर शहरों में हर साल जनवरी मे क्रमश: हिमटेक्स्टिल और डोमोटेक्स लगता है। दोनों अपने आपमें टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म माने जाते हैं। भदोही के निर्यातकों का पहले डोमोटेक्स के प्रति रुझान अधिक रहता था, लेकिन इस बार निर्यातकों ने हिमटेक्स्टिल को पसंद किया। सीईपीसी और निजी रूप से भदोही से लगभग 60 निर्यातक इस समय जर्मनी के दौरे पर हैं।
बोले निर्यातक
अमेरिकी टैरिफ से भारतीय कालीन उद्योग को गहरा आघात लगा है। हिमटेक्स्टिल में यह बात स्पष्ट रूप से देखने को मिली। हमारे कालीन दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले महंगे हो गए हैं। - संतोष गुप्ता।
हमारे उत्पाद अद्वितीय होते हुए भी बहुत अच्छा कारोबार नहीं कर पाए। अमेरिकी खरीदारों की आमद कम रही। अमेरिकी खरीदारों ने जो आवश्यक खरीदारी ही की। - जाबिर बाबू अंसारी।
बाजार ठीक ठाक रहा। वैश्विक मंदी के बीच यूरोपीय बायरों ने अच्छी खरीदारी की। हमारे कई अमेरिकी खरीदार स्टॉल पर आए। टैरिफ के कारण उन्होंने केवल 25 प्रतिशत तक खरीदारी की। - ईश्वरचंद गुप्ता।
हमारे उत्पादों की महंगाई को छोड़ दें तो सबकुछ अच्छा रहा। हमारे कालीनों को लोगों ने खूब पसंद किया। लोगों ने पूछताछ भी की। अमेरिकी खरीदार फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं। - प्रियम बरनवाल।