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1857 के अमर शहीद का स्मारक स्थल बदहाल

Mon, 25 Jan 2016 01:28 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
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पूर्वी यूपी से  बिहार तक अंग्रेजों की नाक में दम कर देने वाले झूरी सिंह के स्मारक स्थल  का शिलान्यास 34 साल पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने किया, लेकिन  आज तक स्मारक स्थल मुकम्मल नहीं हो सका।
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जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता से क्रांतिकारियों का गांव आज भी उपेक्षित है। कई दशक से सांसद और विधायक स्मारक स्थल को ऐतिहासिक बनाने का दावा तो किए लेकिन कुछ हुआ नहीं।

1857  की क्रांति के महान योद्धा रहे अमर शहीद झूरी सिंह का जन्म जिले के सुरियावां क्षेत्र के परऊपुर गांव में 21 अक्टूबर 1816 में हुआ था।

 यूरोपीय  इतिहासकार जिन्हें जनक्रांति के नायक मानते हैं, उन्होंने जगदीशपुर  (बिहार) निवासी क्रांतिकारी बाबू कुंवर से मुलाकात के बाद दुद्धी से लेकर  रोहतास (बिहार) तक क्रांति का जो बिगुल फूंका उससे अंग्रेजी हुकूमत की  चूलें हिल गईं। मिर्जापुर के ओझला नाला में इस देशभक्त को फांसी पर चढ़ा  दिया गया।
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 झूरी सिंह के प्रपौत्र रामेश्वर सिंह बताते हैं कि 1981 में  तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने परऊपुर में शहीद स्मारक का शिलान्यास किया था, लेकिन आज तक स्मारक स्थल पूरी तरह नहीं बन सका है।  ज्ञानपुर-दुर्गागंज मार्ग का नामकरण झूरी सिंह के नाम पर किया गया था,  लेकिन लोक निर्माण विभाग की मनमानी के चलते सभी स्थानों पर लगे बोर्डों से  झूरी सिंह का नाम हटा दिया गया।
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