औराई ट्रामा सेंटर में घायल बच्ची का हो रहा एक्सरे। संवाद
औराई। दो साल पहले औराईं सीएचसी को अपडेट करके 1.68 करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। इसका उद्देश्य था कि सड़क हादसे में घायल मरीजों को जिले में ही समुचित उपचार मिले। हाल यह है कि सड़क हादसे में घायल हों या अन्य इमरजेंसी केस में आए मरीजों की सिर्फ यहां मरहम पट्टी होती है। इसके बाद यहां तैनात डॉक्टर, मरीजों और तीमारदारों को बेहतर उपचार की सलाह देकर ट्रॉमा सेंटर वाराणसी या फिर प्रयागराज के लिए रेफर पर्ची बनाकर दे देते हैं। कारण कि इमरजेंसी में इलाज के लिए यहां मशीनें और सुविधाएं नहीं हैं। ऊंज से बाबूसराय तक 45 किमी तक हाइवे है। इसमें लालानगर से बाबूसराय तक यातायात विभाग ने एक्सीडेंटल जोन घोषित किया है। हाईवे पर हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए जनपद की सीमा बाबूसराय और ऊंज के बीच औराई सीएचसी को अपडेट करके ट्राॅमा सेंटर बनाया गया। साल 2020 में कोविड काल में इसका प्रयोग कोविड वार्ड के रूप में किया गया था। साल 2024 तक सिर्फ ऑन काल चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई।
व्यवस्था की मांग के लिए सिर्फ पत्राचार : यहां व्यवस्था की मांग के लिए तैनात अधीक्षक सिर्फ पत्राचार की बात बताते हैं। दो साल में अब तक 15 बार व्यवस्था बढ़ाने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। हालांकि अभी तक सुविधाएं नहीं मिली। एक्स-रे फिल्म खत्म: ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां एक्स-रे फिल्म खत्म हो गई है। डॉक्टर मशीन के स्क्रीन पर फिल्म देखते हैं और रिपोर्ट के आधार पर मरीजों का इलाज करते हैं।