ज्ञानपुर। जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले युवक की जमानत याचिका खारिज कर दी। पुलिस अभिरक्षा में उसे जेल भेज दिया गया।
इब्राहिमपुर गांव निवासी अमित कुमार पुत्र लालचंद्र बिंद अन्य पिछड़ा वर्ग का होने के बावजूद खटिक जाति का प्रमाण पत्र लगाकर सीपीएमटी पास कर लिया था। इससे एससी कोटे के तहत उसका चयन एमबीबीएस में हो गया। गांव निवासी विजय बहादुर पुत्र पारसनाथ की शिकायत पर जांच हुई, जिसमें एक-एक करके गड़बड़ी सामने आई। जवाहर नवोदय की ओर से ओबीसी प्रमाण पत्र से प्रवेश लेने की बात सामने आई, जबकि छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ने एससी प्रमाण पत्र से प्रवेश लेने के अभिलेख उपलब्ध कराए।
जिलाधिकारी ने तत्कालीन तहसीलदार ज्ञानपुर सुनील कुमार से जांच कराई, जिसमें स्पष्ट हो गया कि युवक ने एमबीबीएस की डिग्री फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे प्राप्त की थी। प्रकरण में कई राजस्वकर्मियों की गर्दन फंसते देख तहसील प्रशासन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। शिकायतकर्ता ने वर्ष 2017 में 156(3) के तहत आरोपी अमित के खिलाफ जालसाजी समेत कई धाराओं में गोपीगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया। सुनवाई के समय आरोपी के कोर्ट में न आने के कारण उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया। शुक्रवार को आरोपी कोर्ट में पेश हुआ। आरोपी के निजी एवं शासकीय अधिवक्ता दिनेश पांडेय के बीच बहस हुई। जिला जज अनिल कुमार ने अपराध को गंभीर मानते हुए आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी। अंतत: उसे जेल जाना पड़ा।